खरीफ से पहले खेतों में लहलहायी गरमा धान की फसल, खैरा के किसान ने लौटायी पुरानी खेती की परंपरा

जमुई जिले में खरीफ सीजन की तैयारी के बीच, खैरा प्रखंड के एक किसान ने पारंपरिक गरमा धान की खेती से अपनी अलग पहचान बनाई है. उनकी चार कट्ठा खेत में लगी फसल कटाई के लिए तैयार है, जो साल में तीन फसल लेने की संभावना को दर्शाती है.

जमुई. जिले में इन दिनों खरीफ सीजन की तैयारियां जोरों पर हैं. किसान धान का बिचड़ा तैयार करने में जुटे हैं, ताकि समय पर खेतों में रोपाई की जा सके. इसी बीच खैरा प्रखंड के मांगो बंदर गांव के किसान ध्रुव कुमार सिंह ने पारंपरिक गरमा धान की खेती कर अलग पहचान बनाई है. उनके चार कट्ठा खेत में लगी गरमा धान की फसल में अब बालियां निकल आई हैं और कुछ ही दिनों में कटाई शुरू होने की उम्मीद है.

ध्रुव कुमार सिंह ने बताया कि एक समय इलाके में गरमा धान की खेती आम थी, लेकिन अधिक मेहनत, लगातार सिंचाई की आवश्यकता और बढ़ती लागत के कारण किसानों ने धीरे-धीरे इसे छोड़ दिया. गर्मी के मौसम में इस फसल को हर दो-तीन दिन पर सिंचाई करनी पड़ती है. यही कारण है कि समय के साथ इसकी खेती लगभग समाप्त हो गई. उन्होंने अपने पिता के अनुभव से प्रेरित होकर इस पारंपरिक खेती को फिर से अपनाने का निर्णय लिया.

दो बीघा में खेती की थी योजना, मजदूरों की कमी बनी बाधा

ध्रुव कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब दो बीघा में गरमा धान लगाने के उद्देश्य से बिचड़ा तैयार किया था, लेकिन समय पर मजदूर उपलब्ध नहीं होने के कारण केवल चार कट्ठा में ही रोपाई कर सके. जितनी रोपाई स्वयं कर पाए, उतनी ही खेती की. उन्होंने कहा कि फसल उम्मीद से बेहतर हुई है और धान में अच्छी बालियां आ चुकी हैं, जिससे अच्छी उपज मिलने की संभावना है.

एक ही खेत से साल में तीन फसल लेने की संभावना

ध्रुव के अनुसार गरमा धान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे एक ही खेत में साल में तीन फसल लेने का अवसर मिलता है. सामान्य तौर पर किसान धान और गेहूं की दो प्रमुख फसलें लेते हैं, लेकिन गरमा धान की कटाई खरीफ धान की रोपाई से पहले हो जाती है. ऐसे में किसान पहले गरमा धान की फसल ले सकते हैं और फिर उसी खेत में खरीफ धान की रोपाई कर सकते हैं. इससे खेत का बेहतर उपयोग होने के साथ उत्पादन भी बढ़ता है.

उन्होंने बताया कि खरीफ धान के लिए अलग से बिचड़ा तैयार किया जा रहा है. जब तक बिचड़ा रोपाई योग्य होगा, तब तक गरमा धान की कटाई पूरी हो जाएगी और उसी खेत में खरीफ धान की रोपाई कर दी जाएगी. उनका मानना है कि यदि पर्याप्त सिंचाई और श्रमिक उपलब्ध हों तो गरमा धान की खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प साबित हो सकती है.

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Published by: Ajeet Kumar

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