यूरिया की कालाबाजारी, मंहगे दामों में खाद खरीदने को विवश किसान

यूरिया उर्वरक अनुपलब्धता एक बार फिर किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है.

सोनो. यूरिया उर्वरक अनुपलब्धता एक बार फिर किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है. जब किसानों को यूरिया की सर्वाधिक जरूरत है तो उसकी उपलब्धता पर ग्रहण लग गया है. उपलब्ध है भी तो महंगे दामों में. मजबूरन किसान 267 रुपये निर्धारित मूल्य की जगह 400 से 450 रुपये प्रति बैग की दर से यूरिया खरीद रहे हैं. किसान चिंतित है रोपनी के 21 दिन बाद जब फसल को यूरिया की सबसे अधिक जरूरत पड़ी तो बाजार में यह आसानी से उचित मूल्य पर मिल नहीं रहा है. कुछ दुकानदार स्टाक न होने का बहाना बनाते हैं, तो कुछ ऊंची कीमत वसूलकर यूरिया बेचने की जुगत लगा रहे हैं. छोटे किसान महंगे दाम चुकाने में असमर्थ हैं और खेतों में खाद डालने का सही समय निकलता जा रहा है. इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ने का खतरा है. सोनो में इस बार अच्छी बारिश के बाद किसानों ने बड़े उत्साह के साथ धान की रोपनी की थी. लेकिन यूरिया की कालाबाजारी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर रहा है. अगर समय पर खाद नहीं डाली गई तो मेहनत बेकार चली जायेगी. किसान जाएं तो कहां जाएं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Pankaj kumar singh

पंकज कुमार सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के जमुई कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

और पढ़ें
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >