बरहट . नेताओं के वादों की बारिश में भीगकर लोकतंत्र को तो मजबूत बनाने में अपना कर्तव्य तो निभा दिया, किंतु समाज में विकास सूखा ही रह गया. इसलिए बरहट प्रखंड के आदिवासी समाज का सब्र अब जवाब देने लगा है. चुनाव दर चुनाव उम्मीदें लेकर वोट देने वाले चोरमारा, मुसहरी टांड़, गुरमाहा और जामुनिया टांड़ के ग्रामीण अब नेताओं की बेरुखी से आक्रोशित हैं. चोरमारा बूथ के 1011 मतदाता हर बार वोट देने लाइन में खड़े मिलते हैं, लेकिन इनके गांवों में अब भी टूटी सड़कें, सूखे हैंडपंप और अंधेरे में डूबे घर ही विकास की तस्वीर पेश करते हैं. गांव के बुजुर्ग जगन्नाथ कोड़ा कहते हैं, नेता भाषणों में गांवों को स्वर्ग बना देते हैं, लेकिन हकीकत में हमें सिर्फ ठगा जाता है.
बिजली-पानी नहीं, अस्पताल नहीं, सुनवाई भी नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि यहां न नियमित बिजली है, न साफ पीने का पानी, और न ही कोई स्वास्थ्य सुविधा. स्कूलों की हालत तो खस्ताहाल है. चोरमारा के करमू कोड़ा, गुरमाहा के राजेंद्र कोड़ा और मुसहरी टांड़ के मंगल कोड़ा ने बताया कि प्रशासन सर्वे तो करता है, लेकिन काम आज तक शुरू नहीं हुआ. गुड्डू राय, जामुनिया टांड़ ने कहा कि हम वोट तो देते हैं, पर हमारी कोई नहीं सुनता. चुनाव सम्पन्न होने के बाद नेताजी हमारे गांव की ओर आना ही भूल ही जाते हैं.
नेताओं से नाराज आदिवासी समाज – अब चेत गया है गांव
बरहट क्षेत्र के आदिवासी अब यह तय कर चुके हैं कि अबकी बार वोट उन्हीं को मिलेगा, जो काम करेगा. गुरमाहा के ग्रामीणों ने साफ कहा, अब वोट भावनाओं पर नहीं, काम पर मिलेगा. ग्रामीणों ने नेताओं को खुली चेतावनी दी है अब वादों से पेट नहीं भरता, अब सड़कों, पानी, बिजली और अस्पताल की जरूरत है.
नक्सल छाया हटने के बाद पहली बार गांव में वोटिंग की तैयारी
यह क्षेत्र कभी नक्सल प्रभावित था. बरसों तक लोग डर के साये में जीते रहे. पहले मतदान केंद्रों को बरहट मुख्यालय में शिफ्ट करना पड़ता था और ग्रामीणों को 50 किलोमीटर दूर जाकर वोट डालना होता था. लेकिन अब स्थिति बदली है. नक्सली गतिविधियों पर लगाम लग चुकी है. इस बार गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में मतदान की तैयारी पूरी हो चुकी है. प्रशासन ने क्षेत्र का निरीक्षण भी कर लिया है.
गांव अब बदलाव की राह पर… पर क्या मिल पायेगा न्याय
चुनाव नजदीक है और गांव की आंखों में फिर एक बार उम्मीद की चमक है. लेकिन इस बार ग्रामीणों ने ठान लिया है अब नहीं चाहिए झूठे वादे, चाहिए हमारा हक और सम्मान.
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