जहां कभी गूंजती थीं गोलियां, आज वहां हर गर्भवती तक पहुंच रहीं स्वास्थ्य सेवाएं

Changing Chormara : बिहार का कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा चोरमारा गांव अब विकास की राह पर है. जिला प्रशासन और आशा कार्यकर्ताओं की पहल से गांव की गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल रही है, जिससे मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आया है.

Changing Chormara : बिहार के जमुई जिले का चोरमारा गांव कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, जहां बंदूक की गूंज और दहशत के बीच विकास वर्षों तक ठहर गया था. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. जिला प्रशासन की पहल और आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति के बाद गांव की गर्भवती महिलाएं नियमित रूप से सरकारी अस्पताल पहुंचकर प्रसव पूर्व जांच करा रही हैं. इससे मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है.

दहशत से विकास की ओर बढ़ा चोरमारा

बरहट प्रखंड का चोरमारा गांव कभी विकास से कोसों दूर था. स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव इतना गंभीर था कि गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिल पाता था और कई मामलों में असमय मौत तक हो जाती थी. लेकिन अब जिला प्रशासन की पहल से गांव में बदलाव की बयार बह रही है. जिलाधिकारी नवीन कुमार के निर्देश पर गांव में आशा कार्यकर्ता की बहाली के बाद सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं सीधे लोगों के घर तक पहुंचने लगी हैं.

आशा बनीं बदलाव की सबसे बड़ी कड़ी

मंगलवार को गांव की आधा दर्जन से अधिक गर्भवती महिलाएं आशा कार्यकर्ता सुंगनती कुमारी के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बरहट पहुंचीं. यहां प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार की देखरेख में सभी महिलाओं की रक्तचाप, शुगर, हीमोग्लोबिन सहित आवश्यक प्रसव पूर्व जांच की गई. साथ ही उन्हें आवश्यक दवाएं और सुरक्षित मातृत्व से जुड़ी चिकित्सकीय सलाह भी दी गई.

महिलाओं ने बताया, अब नहीं रहती पहले जैसी चिंता

जांच कराने पहुंचीं प्रतिमा कुमारी, काजल कुमारी, निशा कुमारी, बिंदा देवी, छोटी कुमारी और अंजू देवी ने बताया कि पहले गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं होने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई महिलाओं की जान तक चली जाती थी. अब आशा कार्यकर्ता नियमित रूप से घर-घर जाकर जांच कराने के लिए प्रेरित करती हैं. इससे महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है और वे समय पर सरकारी अस्पताल पहुंचकर इलाज करा रही हैं.

गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र की मांग

ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि यदि चोरमारा गांव में ही स्वास्थ्य उपकेंद्र का अपना भवन बन जाए तो गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य मरीजों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी. इससे गांव में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुलभ एवं प्रभावी हो सकेंगी.

चिकित्सा पदाधिकारी बोले, जागरूकता का दिख रहा सकारात्मक असर

प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने कहा कि आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति के बाद गांव में लगातार स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इसका सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. गर्भवती महिलाएं नियमित प्रसव पूर्व जांच के लिए अस्पताल पहुंच रही हैं, जिससे सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि क्षेत्र का कोई भी परिवार सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे.

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