Jamui News: चकाई के सूरत में मजदूरी करने वाले पिता और गांव में खेती संभालने वाली मां के बेटे ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने पूरे बरदघट्टी गांव को गर्व से भर दिया. सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई कर कमलेश कुमार वर्मा ने कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त उच्चतर माध्यमिक स्तरीय परीक्षा (CHSL) 2025 में सफलता हासिल की और केंद्र सरकार में अवर श्रेणी लिपिक यानी LDC का पद प्राप्त किया.
बुधवार को जब कमलेश अपने गांव पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन्हें फूल-माला पहनाकर सम्मानित किया. गांव के प्रवेश द्वार पर आयोजित स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में लोग जुटे. किसी के लिए यह सिर्फ एक सरकारी नौकरी पाने की खबर थी, तो किसी के लिए यह उस बेटे की सफलता थी जिसने अभावों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा.
पिता सूरत में करते हैं मजदूरी, मां संभालती हैं खेती
गजही पंचायत के सुदूरवर्ती बरदघट्टी गांव निवासी कमलेश के पिता महादेव वर्मा सूरत में मजदूरी करते हैं. उनकी मां उगनी देवी गांव में रहकर खेती-बाड़ी करती हैं.
परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि कमलेश के लिए पढ़ाई का रास्ता आसान हो. इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई को अपनी मंजिल बनाने का फैसला किया. ग्रामीणों के अनुसार, कमलेश बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे और सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत करना नहीं छोड़ा.
यही मेहनत आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.
गांव में पढ़ाई शुरू की, फिर पटना जाकर की तैयारी
कमलेश ने मैट्रिक तक की पढ़ाई गांव में ही की. इसके बाद बेहतर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए वह पटना चले गये.
गांव से निकलकर शहर में पढ़ाई करना और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था. लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी. कर्मचारी चयन आयोग की CHSL परीक्षा में सफलता हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी प्रतिभा और मेहनत के रास्ते की अंतिम बाधा नहीं है.
बरदघट्टी के इतिहास में पहली सरकारी नौकरी
कमलेश की उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार बरदघट्टी गांव के इतिहास में सरकारी नौकरी हासिल करने वाले वह पहले युवा हैं.
उनकी सफलता की खबर गांव में पहुंचते ही खुशी का माहौल बन गया. परिवार से लेकर पड़ोस और गांव के लोगों तक ने इसे अपनी उपलब्धि की तरह मनाया.
ग्रामीणों का कहना है कि कमलेश की सफलता से गांव के दूसरे छात्र-छात्राओं को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी.
गांव पहुंचते ही हुआ सम्मान
पटना से चकाई पहुंचने के बाद कमलेश का बरदघट्टी प्रवेश द्वार पर ग्रामीणों ने स्वागत किया. यहां स्वागत-सह-सम्मान समारोह आयोजित किया गया.
ग्रामीणों ने कमलेश को फूल-माला पहनाकर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. इस दौरान लोगों ने कहा कि कमलेश की उपलब्धि केवल उनके परिवार की खुशी नहीं है, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है.
कमलेश की सफलता में उनके माता-पिता के साथ उनके दादा बैजनाथ महतो के आशीर्वाद और सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही.
Jamui News: एक नौकरी, लेकिन पूरे गांव के लिए बड़ी उम्मीद
कमलेश की कहानी ग्रामीण परिवेश के उन युवाओं के लिए खास संदेश देती है, जो सीमित संसाधनों के कारण बड़े सपने देखने से हिचकते हैं. मजदूर पिता का बेटा होने के बावजूद कमलेश ने अपनी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.
उन्होंने गांव में पढ़ाई शुरू की, आगे की शिक्षा के लिए पटना गये और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर केंद्र सरकार की नौकरी हासिल की.
अब उनकी सफलता से गांव के दूसरे युवाओं की उम्मीदें भी बढ़ी हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कमलेश ने यह साबित किया है कि मेहनत, लगन और सही दिशा में तैयारी हो तो गांव से निकलकर भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.
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