बरहट (जमुई). बरहट प्रखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एक आशा कार्यकर्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर प्रखंड स्तर के एक जिम्मेदार पदाधिकारी पर सरकारी राशि के भुगतान में कथित कमीशन मांगने और पैसे नहीं देने पर परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. आशा कार्यकर्ता का दावा है कि सीएचओ कार्य के लिए विभाग की ओर से खाते में भेजी गई 16 हजार रुपये की राशि में से 8 हजार रुपये तक की मांग की जा रही है. हालांकि आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
16 हजार की राशि में 8 हजार मांगने का आरोप
आशा कार्यकर्ता के अनुसार, उनके द्वारा किए गए कार्य के एवज में विभाग ने सीधे खाते में 16 हजार रुपये की राशि भेजी. आरोप है कि इसके बावजूद प्रखंड स्तर के एक जिम्मेदार पदाधिकारी द्वारा उसमें से 8 हजार रुपये देने की मांग की जा रही है. आशा कार्यकर्ता का कहना है कि सरकारी राशि सीधे खाते में भेजे जाने के बावजूद उसमें हिस्सेदारी मांगना विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.
प्रसव के बाद मिलने वाली राशि में भी 100 रुपये मांगने का आरोप
आशा कार्यकर्ता ने प्रसव के बाद गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार के लिए मिलने वाली 1400 रुपये की सरकारी सहायता राशि में भी कथित तौर पर 100 रुपये मांगने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि राशि नहीं देने पर संबंधित लाभुक के खाते में भुगतान कराने में आनाकानी की जाती है. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला सीधे गरीब और जरूरतमंद लाभुकों के अधिकार से जुड़ा होगा.
मानदेय भुगतान में भी पैसे मांगने का दावा
आशा कार्यकर्ता ने मानदेय भुगतान को लेकर भी कथित तौर पर पैसे मांगने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि पैसे देने से इनकार करने वाले कर्मियों को झूठे मामले में फंसाने तक की धमकी दी जाती है. इन आरोपों के बाद प्रखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में कथित दबाव और वसूली की कार्यशैली को लेकर चिंता बढ़ गई है.
मैदान में आशा, कार्यालय में कथित वसूली का दबाव
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और आम लोगों तक स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी पहुंचाती हैं. सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने से लेकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने तक में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. ऐसे में कार्यालय स्तर पर कथित रूप से पैसे की मांग किए जाने से उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है और फील्ड में काम करने में परेशानी हो रही है.
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभुकों और कर्मियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, तो कथित तौर पर बीच में हिस्सेदारी किस आधार पर मांगी जा रही है. फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. लिखित शिकायत और जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी.
लिखित शिकायत मिले तो होगी जांच
इस संबंध में जिला चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि किसी आशा कार्यकर्ता से कोई विभागीय कर्मी पैसे की मांग करता है तो इसकी लिखित शिकायत मिलने पर जांच-पड़ताल कराई जाएगी और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी.
