धान की रोपनी के बाद खाद ने बढ़ायी किसानों की चिंता, बरहट में डीएपी-यूरिया के अलग-अलग रेट से उठे सवाल

बरहट प्रखंड के किसान डीएपी और यूरिया सरकारी दर से अधिक कीमत पर खरीदने को मजबूर हैं. पानी की किल्लत के बाद अब खाद के लिए मनमानी कीमत चुकानी पड़ रही है. खेती की लागत बढ़ने से किसान चिंतित हैं.

DAP Urea Price in Barhat: धान की रोपनी के बाद अब किसानों की चिंता खेत में फसल बचाने को लेकर है. फसल को समय पर खाद चाहिए, लेकिन बरहट प्रखंड में किसानों का आरोप है कि सरकारी दर पर डीएपी और यूरिया नहीं मिल रही है. दुकानों पर खाद के लिए उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि अलग-अलग दुकानों पर खाद के अलग-अलग दाम बताये जा रहे हैं.

किसानों का कहना है कि खेती की लागत पहले ही लगातार बढ़ रही है. पानी की परेशानी के बीच किसी तरह धान की रोपनी पूरी की. अब खाद के लिए अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ रही है. अगर समय पर खाद नहीं मिली तो फसल के उत्पादन पर असर पड़ने का डर भी किसानों को सता रहा है.

ऐसे में खेतों में मेहनत कर रहे अन्नदाताओं का सीधा सवाल है. जब सरकार निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, तो किसानों को ज्यादा कीमत क्यों देनी पड़ रही है?

पानी के बाद खाद ने बढ़ायी किसानों की परेशानी

बरहट निवासी किसान दिनेश यादव बताते हैं कि पहले पानी की किल्लत ने धान की रोपनी को मुश्किल बना दिया था. किसी तरह रोपनी पूरी की गयी. अब फसल को खाद देने का समय आया तो डीएपी और यूरिया उचित कीमत पर नहीं मिल रही है.

दिनेश यादव के मुताबिक, फसल को सही समय पर खाद नहीं मिली तो अच्छी पैदावार की उम्मीद कमजोर हो सकती है. किसान पहले ही खेती में काफी खर्च कर चुके हैं. ऐसे में खाद के लिए अतिरिक्त रकम देना उनकी परेशानी और बढ़ा रहा है.

एक ही खाद, दुकानों पर अलग-अलग कीमत

कसरहट गांव के किसान विक्की राम ने बताया कि उन्होंने कई दुकानों पर जाकर खाद और डीएपी की कीमत पूछी. उनके अनुसार अलग-अलग दुकानों पर अलग-अलग रेट बताया गया.

आखिरकार फसल की जरूरत को देखते हुए उन्हें मजबूरी में खाद खरीदनी पड़ी. किसान का सवाल है कि अगर सरकारी दर तय है तो दुकानदार उसी दर पर खाद क्यों नहीं बेच रहे हैं.

किसानों का कहना है कि बाजार में कीमत को लेकर स्पष्टता नहीं होने का सीधा नुकसान उन्हें उठाना पड़ रहा है. किसान के सामने विकल्प भी सीमित है, क्योंकि खाद समय पर खेत में डालना जरूरी है.

किसान बोले-खेती करना जंग लड़ने जैसा

कटौना फुलवरिया निवासी किसान गणेश यादव ने खेती की बढ़ती लागत को लेकर चिंता जतायी. उन्होंने कहा कि आज खेती करना किसी जंग जीतने से कम नहीं है.

उनके मुताबिक खाद, मजदूरी और खेती से जुड़ी दूसरी जरूरी चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. इस सीजन में उन्होंने यूरिया 10 रुपये और डीएपी 40 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदकर खेत में डाली है.

किसान का कहना है कि किसी तरह धान की रोपनी पूरी की गयी, लेकिन अब सरकारी दर पर खाद नहीं मिलने से लागत और बढ़ रही है. ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि खेती की लागत निकालकर वे अपनी आय कैसे बचा पायेंगे.

खाद की कीमतों को लेकर निगरानी पर उठे सवाल

किसानों के आरोपों के बाद खाद वितरण व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. किसानों का कहना है कि यदि खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और सरकारी दर निर्धारित है, तो दुकानों पर कीमत अलग-अलग क्यों बतायी जा रही है.

किसानों के बीच यह सवाल भी है कि खाद दुकानों पर स्टॉक और बिक्री की कीमतों की नियमित जांच होती है या नहीं. उनका कहना है कि खाद की जरूरत फसल के एक खास समय पर होती है. इस दौरान किसान खाद नहीं खरीद पाये तो इसका असर सीधे फसल पर पड़ सकता है.

ऐसे में किसानों की मांग है कि विभाग खाद की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी बिक्री की कीमत की भी प्रभावी निगरानी करे.

फोन पर मिली शिकायत, लिखित आवेदन का इंतजार

जिला कृषि पदाधिकारी हरिमोहन मिश्र ने बताया कि किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर खाद नहीं मिलने की शिकायत उन्हें फोन के माध्यम से मिली है. हालांकि अब तक किसी किसान ने लिखित शिकायत नहीं की है.

उन्होंने बताया कि लिखित शिकायत नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित खाद दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई करने में विभाग को परेशानी होती है. इसके बावजूद जिले के सभी खाद विक्रेताओं को किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर ही खाद उपलब्ध कराने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है.

जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है. यदि इसके बावजूद कोई रिटेलर मनमानी कीमत पर खाद बेचता है या अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं करता है, तो विभाग जांच करायेगा.

DAP Urea Price in Barhat: दोषी दुकानदारों पर होगी कार्रवाई

हरिमोहन मिश्र के अनुसार जांच में यदि कोई खाद विक्रेता निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत पर खाद बेचते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी.

अब किसानों की नजर विभाग की कार्रवाई पर है. किसानों का कहना है कि सिर्फ निर्देश जारी करने से समस्या खत्म नहीं होगी. खाद की दुकानों पर वास्तविक कीमत और स्टॉक की नियमित निगरानी जरूरी है.

धान की फसल इस समय खाद की मांग कर रही है और किसान भी समय पर खाद चाहते हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में विभागीय जांच और खाद विक्रेताओं की बिक्री व्यवस्था पर निगरानी इस पूरे मामले में अहम होगी.

फिलहाल बरहट के किसानों के सामने खेत में फसल बचाने की चिंता है और खाद की बढ़ती लागत उनकी परेशानी बढ़ा रही है. किसान चाहते हैं कि सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था जमीन पर भी उतरे, ताकि खेती की बढ़ती लागत के बीच उन्हें कुछ राहत मिल सके.


विक्की राम | Prabhat Khabar Network
गणेश यादव | Prabhat Khabar Network

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By Pankaj kumar sing

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