घर की चौखट लांख अपने सपनों को उड़ान दे रहीं संगीता
जमुई : कहते हैं कि जब मन में कुछ करने की ललक और उस काम को करने का दृढ़ निश्चय हो तो चौखटें बहुत पीछे छूट जाती हैं. और उसमें भी अगर प्रेम वनस्पति के प्रति हो तब प्रकृति भी उस विश्वास को सही साबित करने में लग जाती है. और कुछ यही मिसाल कायम कर रही है प्रखंड क्षेत्र के सुदूरवर्ती जीतझिंगोई पंचायत के प्रधान चक गांव की महिला उद्यमिता संगीता देवी, जिसने अपने कौशल का परिचय देते हुए जुट से पाट ज्वेलरी तैयार करके न सिर्फ आसपास की महिलाओं बल्कि पूरे बिहार भर की महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं. बताते चलें कि प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत जीतझिंगोय भपंचायत का प्रधान चक गांव कई मायनों में आज भी विकास से कोसों दूर है.
परंतु वहां की एक स्थानीय महिला ने अपने कलाकृति का ऐसा नायाब नमूना प्रदर्शित किया कि वह अब अपने गांव सहित पूरे राज्य भर की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है. और इसी का नतीजा है कि सुदूरवर्ती क्षेत्र की एक महिला के कौशल को कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भी आयाम देने का प्रयास किया है. जिसमें गूगल, कोकाकोला, नेशनल इंश्योरेंस, रोल्स रॉयस और आइडिया जैसी कंपनियों द्वारा प्रायोजित जागृति यात्रा के लिए संगीता का चयन किया गया और वह देश भर के 450 महिला उद्यमिता में बिहार से एकलौती महिला उद्यमिता के तौर पर शामिल हुई. संगीता ने जुट से गहने तैयार कर उसने पाट ज्वेलरी को बाजार में उतार दिया और उसने खूब सुर्खियां बटोरी. संगीता बताती हैं कि शुरुआत में मैंने सर्वप्रथम कृषि मेले में जुट से बनी ज्वेलरी को बिकने के लिए रखा था परंतु मुझे वहां बाजार नहीं मिल सका. इसके बाद सरस मेला में मैंने अपने गहनों को बेचने के लिए भेजा जहां मेरे सारे गहने हाथो हाथ बिक गये. इसके बाद जागृति यात्रा के दौरान मैं भारत के कई शहरों का भ्रमण किया. इस दौरान मुझे अपने गहनों को प्रदर्शित करने का अवसर भी मिला और इस दौरान फ्रांस तथा रूस की कुछ महिलाओं ने भी जुट से बनी मेरी ज्वेलरी को खरीदा.
परेशानियां भी कम नहीं
संगीता बताती हैं कि जूट की ज्वेलरी निर्माण करने में कई सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. बहरहाल सबसे बड़ी कठिनाई बाजार के नहीं होने का है. इस कारण मुझे दूसरे शहर जाकर अपने गहनों को बेचना पड़ता है. इसके अलावा सामान के लिए भी मुझे पटना और दिल्ली जैसे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है. संगीता ने यह भी बताया कि उसके द्वारा बनाये गये गहनों की कीमत 10 रुपया से लेकर एक हजार रुपये तक होती है. बताते चलें कि संगीता ने अकेले ही जुट के गहने निर्माण करने की शुरुआत की थी.
परंतु वर्तमान समय में 20 से भी अधिक महिलाएं दो समूहों में पाटा ज्वेलरी का निर्माण कर रही है तथा खुद को महिला उद्यमिता के तौर पर स्थापित कर रही हैं. संगीता ने बताया कि मेरी सोच यह है कि मेरे द्वारा निर्माण किये गये गहनों को इस्तेमाल के बाद अगर कोई फेंक भी दे तो उससे कुछ नये पौधे निकल आये तथा वह फिर से वनस्पति को अपना योगदान देते रहें.
