आज तय होगी शादी की तारीख, जल्द उठेगी ज्योति की डोली

जमुई : जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत खैरा मालाकार टोला निवासी आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांग सुधीर मालाकार की बेटी ज्योति की शहनाई बजने की रस्म बुधवार से शुरू हो गयी. इस दौरान समाज के कई युवा वर्ग, दुकानदार एवं स्थानीय लोगों के सहयोग से बुधवार को ज्योति के सगुन, फलदान व तिलकोत्सव के लिए […]

जमुई : जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत खैरा मालाकार टोला निवासी आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांग सुधीर मालाकार की बेटी ज्योति की शहनाई बजने की रस्म बुधवार से शुरू हो गयी. इस दौरान समाज के कई युवा वर्ग, दुकानदार एवं स्थानीय लोगों के सहयोग से बुधवार को ज्योति के सगुन, फलदान व तिलकोत्सव के लिए लोग गया गये.

इस दौरान पूरे रस्म-रिवाज के साथ तिलकोत्सव का कार्यक्रम आयोजित कर सभी जरूरी विधि-विधान के साथ ज्योति के परिजन, रिश्तेदार सहित युवा वर्ग समूह के सदस्य तिलकोत्सव के लिए रवाना हुए. इस दौरान इसका नेतृत्व कर रहे संतोष राणा ने ने बताया कि कोई राजनीतिक दल और राजनेता किसी कार्यक्रम के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, पर वही कार्यक्रम में से अगर थोड़ा ही किसी बेटी के पिता या भाई को दे दिया जाये, तो एक गरीब परिवार उद्धार हो सकता है.

वहीं ज्योति के पिता सुधीर मालाकार, मां संजू देवी सहित ग्रामीणों ने सबका सहयोग करने के लिए उन्हें साधुवाद दिया है. मौके पर राम मालाकार, अरविंद रावत, राजेंद्र माली, गोपाल माली, संजय मालाकार, अरविंद मालाकार सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

ज्योति के सगुन व तिलकोत्सव में गया
गये परिजन
रुपये कम पड़ने पर रुक गयी थी दिव्यांग के पुत्री की शादी
प्रभात खबर ने प्रमुखता से उठाया था मामला
इस मामले को लेकर बीते 15 अप्रैल को प्रभात खबर ने प्रमुखता से मामला उठाया था. बताते चलें कि खैरा थाना क्षेत्र के मालाकार टोला निवासी 18 वर्षीय ज्योति का पिता सुधीर मालाकार चार वर्ष पहले छत से गिर गया था. इस घटना में उसका दोनों पैर नाकाम हो गया था. मेहनत मजदूरी कर घर चलाने वाले सुधीर के घर बैठ जाने के बाद भी उसके परिजनों ने उसका इलाज करवाना जारी रखा. कुल मिलाकर हिस्से में पढ़ने वाली थोड़ी सी जमीन को बेच कर उन्होंने सुधीर का इलाज करवाया, परंतु कोई फायदा नहीं हो सका. अब सुधीर अपने पैरों पर कभी खड़ा नहीं हो सकता. इधर धीरे-धीरे जवान हो रही बेटी की चिंता भी परिजनों को सताने लगी. जिसके बाद ज्योति के एक रिश्तेदार ने उसकी शादी गया निवासी एक लड़के से तय कर दी. लड़का शादी को राजी भी हो गया और उसने दहेज लेने से भी इंकार कर दिया. जिसके बाद खैरा का युवा वर्ग आगे आया तथा ज्योति की शादी का जिम्मा उठाया है.

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