जनप्रतिनिधियों से अब टूट गयी आस, एक चापाकल से 50 घरों की कैसे बुझेगी प्यास

जमुई : सदर प्रखंड क्षेत्र के दौलतपुर पंचायत के अंबा महादलित टोला के लोग आज भी पानी के लिए परेशान हैं. लोगों को आज भी पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. ग्रामीणों की मानें तो जाड़ा, गर्मी और बरसात सभी मौसम में हम लोगों को पीने, नहाने, खाना बनाने एवं अन्य जरूरी […]

जमुई : सदर प्रखंड क्षेत्र के दौलतपुर पंचायत के अंबा महादलित टोला के लोग आज भी पानी के लिए परेशान हैं. लोगों को आज भी पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. ग्रामीणों की मानें तो जाड़ा, गर्मी और बरसात सभी मौसम में हम लोगों को पीने, नहाने, खाना बनाने एवं अन्य जरूरी कार्यों के लिए पानी जमा करने में बहुत दिक्कत होती है.

ग्रामीण दिनेश मांझी और सिंघेश्वर मांझी कहते हैं कि पूर्व में हमारे टोला में पांच चापाकल थे. जिसमें से वर्तमान समय में चार खराब हैं. हम लोग एक चापाकल के भरोसे किसी तरह अपनी प्यास बुझाते हैं. ग्रामीण रामचंद्र मांझी और सीता राम मांझी कहते हैं कि क्या करें बाबू अपने गांव में खराब पड़े चापाकल को ठीक कराने के लिए सभी पंचायत प्रतिनिधि को कह कह कर थक गये हैं. लेकिन कोई हमारी नहीं सुनता है. वोट के समय सब हाथ जोड़ने के लिए जरूर आते हैं, लेकिन उसके बाद हमारी समस्या को देखने वाला कोई नहीं है.

चुनाव के बाद हमारी ओर ताकने तक
नहीं आते हैं प्रतिनिधि
ग्रामीण रेखा और श्यामसुंदरी देवी कहती है कि बाबू हमारी समस्याओं को सुनने और देखने वाला भी कोई नहीं है. बस चुनाव के समय लोग पूछने के लिए जरूर चले जाते हैं. लेकिन उसके बाद कोई वापस मुड़कर हमारी समस्या को दूर करना भी मुनासिब नहीं समझता है. जिसके कारण हमारे गांव में सालों भर पानी की किल्लत बनी रहती है. हम सभी ग्रामीण पानी के लिए सालों भर त्राहिमाम करते रहते हैं.
कई बार हम लोग पीएचडी विभाग के अधिकारियों से और चापाकल लगवाने या खराब पड़े चापाकल को ठीक कराने की गुहार लगा चुके हैं. लेकिन किसी ने हमारी समस्या की ओर आज तक ध्यान देना भी मुनासिब नहीं समझा है. जिसके कारण यह समस्या आज तक उसी तरह बनी हुई है.
चापाकल खराब होने पर दूसरे गांव से लातें
हैं पानी
मुन्नी देवी और फुलवा देवी कहती हैं कि गांव के सभी लोगों को एक-एक करके पीने के पानी, नहाने के पानी और खाना बनाने के लिए पानी जमा करना पड़ता है. जिससे बहुत कठिनाई होती है. रानी और सुमित्रा देवी कहती हैं कि यह हाल तो हमारे गांव में सालों भर बना रहता है. कभी-कभी तो हमारे गांव का सभी चापाकल खराब हो जाता है. ऐसी स्थिति में हम लोगों को नजदीक के दूसरे टोला से अपने जरूरत के लिए पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है. खैरी देवी और गीता देवी कहती हैं कि हमारे टोला में लगभग 50 घर हैं. जिसमें 400 से 500 लोग रहते हैं. लेकिन सभी लोगों को पानी के लिए मात्र एक चापाकल पर ही निर्भर करना पड़ता है.

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