India Nepal Border : भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर भारत में घुसपैठ और तस्करी करने वाले नापाक मंसूबों पर बिहार पुलिस ने अब पूरी तरह नकेल कसने की तैयारी कर ली है. बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने सरदार पटेल भवन में एक उच्चस्तरीय आपात बैठक में न केवल राज्य पुलिस, बल्कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल हुए.
रेल नेटवर्क के जरिए घुसपैठ की नई और खतरनाक साजिशों की जानकारी मिलने के बाद सीमावर्ती रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा का घेरा अब सुरक्षित बनाया जा रहा है.
रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा
खुफिया रिपोर्टों में इस बात का खुलासा हुआ है कि अब सीमा पार से संदिग्ध गतिविधियों और संगठित अपराधों के लिए रेल नेटवर्क को एक सॉफ्ट टारगेट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि सीमा से सटे हर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सघन चेकिंग की जाएगी और संदिग्ध सामानों की विशेष जांच के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा.
अब किसी भी यात्री की गतिविधि संदिग्ध लगने पर एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने में एक पल की भी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. संयुक्त कार्रवाई के जरिए रेल मार्ग को घुसपैठियों के लिए पूरी तरह बंद करने की रणनीति पर मुहर लग चुकी है.
फॉरेंसिक जांच से मजबूत हो रहा कानून
बिहार पुलिस अब अपराध की गुत्थी सुलझाने के लिए लाठी से ज्यादा तकनीक और फॉरेंसिक साइंस पर भरोसा कर रही है. पुलिस मुख्यालय में आयोजित सम्मेलन में डीजीपी ने बताया कि अगले दो वर्षों के भीतर राज्य में 13 फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशालाएं पूरी तरह एक्टिव हो जाएंगी.
साल 2012 में जहां केवल 800 मामलों की फॉरेंसिक जांच होती थी, आज यह आंकड़ा 18 हजार तक पहुंच गया है. वर्तमान में पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर समेत 4 क्षेत्रीय लैब काम कर रही हैं, जबकि 9 नई अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की इमारतें बनकर तैयार हैं, जो अपराधियों को सजा दिलाने में मील का पत्थर साबित होंगी.
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