हाजीपुर: रिमझिम बारिश के बीच गुरुवार से सावन माह और श्रावणी मेले का शुभारंभ हो गया. सावन शुरू होते ही हाजीपुर के शिवालयों में भक्तों की चहल-पहल बढ़ गयी है. शहर के प्रमुख शिव मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है. तीन अगस्त को सावन की पहली सोमवारी है. इस बार सावन में चार सोमवारी पड़ रही हैं. हर सोमवारी को शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है.
शहर के शिवालयों में पूरी हुई तैयारी
श्रावणी मेले को लेकर नगर महादेव बाबा पातालेश्वरनाथ मंदिर के अलावा गांधी चौक स्थित नागेश्वरनाथ मंदिर, राजेंद्र चौक स्थित त्रिलोकीनाथ मंदिर, अनवरपुर चौक स्थित नर्मदेश्वरनाथ मंदिर, कौनहारा घाट स्थित विशालनाथ मंदिर, नेपाली छावनी मंदिर, हेलाबाजार स्थित आदिहरिहरनाथ गौरीशंकर मंदिर, स्टेशन चौक स्थित शिव मंदिर और राजपूत नगर स्थित विशालेश्वरनाथ मंदिर समेत अन्य शिवालयों में तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं.
मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है. सावन के पहले दिन से ही इन मंदिरों में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया. भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं.
आज से शुरू होगी कांवर यात्रा, सोमवार को चढ़ेगा जल
मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ धाम में सावन की पहली सोमवारी पर जलाभिषेक के लिए शुक्रवार से कांवर यात्रा शुरू होगी. कांवरिये सारण के पहलेजा घाट से गंगाजल भरकर बाबा गरीबनाथ के लिए पैदल रवाना होंगे. शुक्रवार की दोपहर बाद से कांवरियों के जत्थे पहलेजा घाट से निकलना शुरू करेंगे.
कांवरिये ‘बाबा नगरिया दूर है, जाना जरूर है’ जैसे जयघोष के साथ करीब 75 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करेंगे. तीन दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में कांवरिये हाजीपुर, सराय, भगवानपुर, गोरौल, कुढ़नी, तुर्की और रामदयालु नगर समेत विभिन्न स्थानों पर पड़ाव डालेंगे.
कांवरिये पहलेजा घाट से शुक्रवार और शनिवार को गंगाजल उठाकर पैदल यात्रा करेंगे और सोमवार की सुबह बाबा गरीबनाथ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे.
पातालेश्वरनाथ मंदिर में सोमवारी मेले की तैयारी पूरी
हाजीपुर शहर के मस्जिद चौक से चौहट्टा के बीच भरत राउत कटरा मुहल्ले में स्थित बाबा पातालेश्वरनाथ मंदिर शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मंदिर में सालभर श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन सावन के महीने में यहां विशेष भीड़ होती है. प्रत्येक सोमवारी को लगने वाले मेले में हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.
नगर महादेव के नाम से प्रसिद्ध बाबा पातालेश्वरनाथ मंदिर में सोमवारी मेले को लेकर विशेष तैयारी की गयी है. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया है.
पाताल से प्रकट हुए थे शिवलिंग, ऐसी है मान्यता
बाबा पातालेश्वरनाथ मंदिर को लेकर स्थानीय स्तर पर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. मस्जिद चौक निवासी वरीय अधिवक्ता शशिभूषण प्रसाद श्रीवास्तव के अनुसार, मुगलकाल में हाजीपुर क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था. स्थानीय मान्यता है कि जंगल में सांपों का विचरण होता था और एक विशाल वट वृक्ष की जड़ के पास सांपों का जमावड़ा रहता था.
कहा जाता है कि ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1885 में इस क्षेत्र की खुदाई करायी गयी. खुदाई के दौरान गोलाकार काले रंग का पत्थर मिला. स्थानीय लोगों ने इसे शिवलिंग माना. मान्यता है कि यह पाताल से प्रकट हुआ शिवलिंग है, जिसके कारण मंदिर का नाम पातालेश्वरनाथ पड़ा.
सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. इस महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है. इसी आस्था के कारण सावन में शिवालयों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है. भक्त जल, दूध, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेते हैं.
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