Flood in Raghopur : वैशाली जिला के राघोपुर प्रखंड क्षेत्र के सभी गांव पिछले कई दिनों से बाढ़ की चपेट में हैं. गंगा का पानी लबालब भरने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. कई इलाकों में घरों के चारों तरफ पानी जमा है, जबकि कई घरों के अंदर भी बाढ़ का पानी घुस चुका है. लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं. खाद्य सामग्री और रोजमर्रा के इस्तेमाल की जरूरी वस्तुएं भी खत्म होने के कगार पर पहुंच गई हैं.
गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी रही तो वर्ष 2016 में दर्ज जलस्तर का रिकॉर्ड टूटने की आशंका जताई जा रही है. बढ़ते पानी के बीच ग्रामीणों में भय का माहौल है.
नाव और ट्रैक्टर ही आवागमन का सहारा, 50 रुपये किराया
प्रखंड की मुख्य और ग्रामीण सड़कों पर चार से पांच फीट तक पानी जमा है. ऐसे में लोगों के आवागमन का सहारा सिर्फ नाव और ट्रैक्टर रह गया है. विभिन्न पंचायतों के लोग जरूरी काम से रूस्तमपुर, जेठली समेत अन्य घाटों तक ट्रैक्टर से पहुंच रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार ट्रैक्टर चालक प्रति व्यक्ति करीब 50 रुपये किराया वसूल रहे हैं.
घाट से लोग नाव पकड़कर कच्ची दरगाह और पटना की ओर जा रहे हैं. फतेहपुर निवासी जय प्रकाश उर्फ छोटू, राघोपुर निवासी प्रभात कुमार और अतुल कुमार सिंह ने बताया कि सड़कों पर पानी भरने से आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है.
ग्रामीणों का आरोप है कि अंचल स्तर पर नाव चलाए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति अलग है. कुछ नावें जनप्रतिनिधियों को दे दी गई हैं, जिनका संचालन उनके स्तर से किया जा रहा है.
न सामुदायिक किचन, न पर्याप्त राशन, सोशल मीडिया पर गुस्सा
बाढ़ के कई दिन बीत जाने के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी पंचायत में सरकार की ओर से सामुदायिक किचन शुरू नहीं किया गया है. सूखा राशन, पॉलिथीन शीट और तिरपाल का पर्याप्त वितरण नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.
ग्रामीण सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. उनका कहना है कि चुनाव के समय घर-घर पहुंचने वाले नेता अब बाढ़ के दौरान केवल निरीक्षण कर खानापूर्ति कर रहे हैं.
ग्रामीणों ने पंचायतों के ऊंचे स्थानों पर तत्काल सामुदायिक किचन शुरू करने के साथ पॉलिथीन, तिरपाल, सूखा राशन, पशुचारा और दवाओं की व्यवस्था करने की मांग की है.
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सरायपुर पंचायत में राहत सामग्री का वितरण किया था. वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल से बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया था.
142 नावों के संचालन का दावा, सरकारी नाव सिर्फ छह
राघोपुर अंचल कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार चार सितंबर तक 20 पंचायतों के 76 गांवों में 142 नावों के संचालन का दावा किया गया है. इनमें सरकारी नावों की संख्या महज छह बताई गई है.
प्रशासन के अनुसार अब तक 1100 पॉलिथीन शीट का वितरण किया गया है. हालांकि सामुदायिक किचन और सूखा राशन वितरण से संबंधित आंकड़ा शून्य है. ऐसे में बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने भोजन और सुरक्षित रहने की चुनौती बनी हुई है.
76 गांवों में बिजली बंद, मोबाइल नेटवर्क भी प्रभावित
बाढ़ के बीच सुरक्षा कारणों से राघोपुर प्रखंड के 76 गांवों में बिजली आपूर्ति बंद है. बिजली नहीं रहने के कारण कई जगह मोबाइल टावर भी प्रभावित हैं और नेटवर्क की समस्या बनी हुई है. लोग मोबाइल चार्ज करने के लिए परेशान हैं.
रात में घरों के अंदर पानी रहने से लोगों को सांप-बिच्छू का डर भी सता रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में बिजली और नेटवर्क नहीं होने के कारण किसी को सूचना देना भी मुश्किल हो जाता है.
जेई रूपेश कुमार यादव ने बताया कि वरीय अधिकारियों के निर्देश पर सुरक्षा कारणों से राघोपुर प्रखंड में बिजली आपूर्ति बंद की गई है.
बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने राघोपुर के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. घरों में पानी घुसने, सड़कों के डूबने और बिजली बंद होने के कारण ग्रामीणों का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित है. ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत और बचाव कार्य तेज करने, पर्याप्त नाव उपलब्ध कराने, सामुदायिक किचन शुरू करने और राशन, तिरपाल, दवा व पशुचारे की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की है.प्रखंड क्षेत्र के सभी गांव पिछले कई दिनों से बाढ़ की चपेट में हैं. गंगा का पानी लबालब भरने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. कई इलाकों में घरों के चारों तरफ पानी जमा है, जबकि कई घरों के अंदर भी बाढ़ का पानी घुस चुका है. लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं. खाद्य सामग्री और रोजमर्रा के इस्तेमाल की जरूरी वस्तुएं भी खत्म होने के कगार पर पहुंच गई हैं. गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी रही तो वर्ष 2016 में दर्ज जलस्तर का रिकॉर्ड टूटने की आशंका जताई जा रही है. बढ़ते पानी के बीच ग्रामीणों में भय का माहौल है.
नाव और ट्रैक्टर ही आवागमन का सहारा, 50 रुपये किराया
प्रखंड की मुख्य और ग्रामीण सड़कों पर चार से पांच फीट तक पानी जमा है. ऐसे में लोगों के आवागमन का सहारा सिर्फ नाव और ट्रैक्टर रह गया है. विभिन्न पंचायतों के लोग जरूरी काम से रूस्तमपुर, जेठली समेत अन्य घाटों तक ट्रैक्टर से पहुंच रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार ट्रैक्टर चालक प्रति व्यक्ति करीब 50 रुपये किराया वसूल रहे हैं.
घाट से लोग नाव पकड़कर कच्ची दरगाह और पटना की ओर जा रहे हैं. फतेहपुर निवासी जय प्रकाश उर्फ छोटू, राघोपुर निवासी प्रभात कुमार और अतुल कुमार सिंह ने बताया कि सड़कों पर पानी भरने से आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है.
ग्रामीणों का आरोप है कि अंचल स्तर पर नाव चलाए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति अलग है. कुछ नावें जनप्रतिनिधियों को दे दी गई हैं, जिनका संचालन उनके स्तर से किया जा रहा है.
न सामुदायिक किचन, न पर्याप्त राशन, सोशल मीडिया पर गुस्सा
बाढ़ के कई दिन बीत जाने के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी पंचायत में सरकार की ओर से सामुदायिक किचन शुरू नहीं किया गया है. सूखा राशन, पॉलिथीन शीट और तिरपाल का पर्याप्त वितरण नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.
ग्रामीण सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. उनका कहना है कि चुनाव के समय घर-घर पहुंचने वाले नेता अब बाढ़ के दौरान केवल निरीक्षण कर खानापूर्ति कर रहे हैं.
ग्रामीणों ने पंचायतों के ऊंचे स्थानों पर तत्काल सामुदायिक किचन शुरू करने के साथ पॉलिथीन, तिरपाल, सूखा राशन, पशुचारा और दवाओं की व्यवस्था करने की मांग की है. शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सरायपुर पंचायत में राहत सामग्री का वितरण किया था. वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल से बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया था.
142 नावों के संचालन का दावा, सरकारी नाव सिर्फ छह
राघोपुर अंचल कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार चार सितंबर तक 20 पंचायतों के 76 गांवों में 142 नावों के संचालन का दावा किया गया है. इनमें सरकारी नावों की संख्या महज छह बताई गई है.
प्रशासन के अनुसार अब तक 1100 पॉलिथीन शीट का वितरण किया गया है. हालांकि सामुदायिक किचन और सूखा राशन वितरण से संबंधित आंकड़ा शून्य है. ऐसे में बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने भोजन और सुरक्षित रहने की चुनौती बनी हुई है.
76 गांवों में बिजली बंद, मोबाइल नेटवर्क भी प्रभावित
बाढ़ के बीच सुरक्षा कारणों से राघोपुर प्रखंड के 76 गांवों में बिजली आपूर्ति बंद है. बिजली नहीं रहने के कारण कई जगह मोबाइल टावर भी प्रभावित हैं और नेटवर्क की समस्या बनी हुई है. लोग मोबाइल चार्ज करने के लिए परेशान हैं. रात में घरों के अंदर पानी रहने से लोगों को सांप-बिच्छू का डर भी सता रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में बिजली और नेटवर्क नहीं होने के कारण किसी को सूचना देना भी मुश्किल हो जाता है. जेई रूपेश कुमार यादव ने बताया कि वरीय अधिकारियों के निर्देश पर सुरक्षा कारणों से राघोपुर प्रखंड में बिजली आपूर्ति बंद की गई है.
बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने राघोपुर के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. घरों में पानी घुसने, सड़कों के डूबने और बिजली बंद होने के कारण ग्रामीणों का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित है. ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत और बचाव कार्य तेज करने, पर्याप्त नाव उपलब्ध कराने, सामुदायिक किचन शुरू करने और राशन, तिरपाल, दवा व पशुचारे की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की है.
