hajipur news. दोबारा बालश्रम करवाते पकड़े जाने वाले प्रतिष्ठानों पर अधिक जुर्माना का हो प्रावधान

बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में गुरुवार को समीक्षात्मक बैठक का आयोजन किया गया

हाजीपुर. बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में गुरुवार को समीक्षात्मक बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में श्रम अधीक्षक, प्राचार्य, आईटीआई, हाजीपुर, महनार एवं प्राचार्य महिला आईटीआई, हाजीपुर एवं प्रखंड के सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी उपस्थित हुए.सबसे पहले आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह ने बैठक में सभी का स्वागत किया. इस दौरान श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के द्वारा यह मंतव्य रखा गया कि बहुत सारे नियोजक ऐसे भी पाये गये है, जिनके यहां बाल श्रमिक एक बार विमुक्त हो जाने के उपरान्त कुछ समय बाद पुनः उनकी दुकान या प्रतिष्ठान में बाल श्रमिक काम करते हुए पाये जाते हैं. ऐसे स्थिति में उपाध्यक्ष से यह अनुरोध किया गया कि नियोजक पर जुर्माना की राशि को और भी अधिक मात्रा में नियोजक से वसूली करवाने का प्रावधान करवाया जाय. उपाध्यक्ष महोदय द्वारा यह बताया गया कि सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी यह जानने की कोशिश करें कि सरकार द्वारा जब आवश्यक सुविधाएं जैसे अनाज, आवास, शिक्षा इत्यादि निःशुल्क में दिये जा रहे हैं तो किन परिस्थतियों में कोई अभिभावक या माता पिता के द्वारा अपने बच्चे से बाल श्रम करवाया जा रहा है.

46 बालश्रमिकों को कराया गया मुक्त

श्रम अधीक्षक द्वारा बताया गया कि वित्तीय वर्ष-2024-25 में 105 धावा दल का संचालन किया गया, जिसमें से कुल-46 बाल श्रमिक विमुक्त किये गये एवं विभिन्न नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई. विमुक्त बाल श्रमिकों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना से आच्छादित कराने की कार्रवाई की गई.बाल श्रम करवाने वाले नियोजकों पर 20 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक जुर्माना अथवा छः माह का कारावास या दोनों का प्रावधान है. इसके साथ ही एमसी मेहता बनाम तामिलनाडु सरकार के आलोक में सर्वोच्च न्यायालय के पारित आदेश के आलोक में नियोजक को प्रति बाल श्रमिक 20 हजार रुपये जिला में संधारित बाल श्रमिक पुनर्वास कोष के खाता में जमा किया जाता है. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अन्तर्गत भी उपरोक्त नियोजकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है.

योग्य बाल श्रमिकों को तत्काल आर्थिक सहायता के रूप में तीन हजार रुपये प्रति विमुक्त बाल श्रमिक के बैंक खाते में राशि अंतरण किया जाता है एवं मुख्यमंत्री राहत कोष से 25 हजार रनपये प्रति बाल श्रमिक की दर से संबंधित विमुक्त बाल श्रमिक के बैंक खाते में राशि को उनके नाम से फिक्स डिपोजिट भी कराया जाता है. बाल श्रम उन्मूलन में शामिल स्टेक होल्डर जैसे :- शिक्षा विभाग, सामाजिक सुरक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य विभाग विमुक्त बाल श्रमिक एवं उनके परिवार को अपने विभाग से संबंधित अनुमान्य लाभ दिया जाता है.

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