hajipur news. एसयूसीआइ ने एनसीइआरटी पाठ्यक्रम से मुगल काल को हटाने का किया विरोध

अनुमंडल मुख्यालय बाजार के फुदेनी चौक पर एसयूसीआइ (कम्युनिस्ट) की एक बैठक जिला सचिव ललित कुमार घोष के नेतृत्व में आयोजित की गयी

महुआ. अनुमंडल मुख्यालय बाजार के फुदेनी चौक पर एसयूसीआइ (कम्युनिस्ट) की एक बैठक जिला सचिव ललित कुमार घोष के नेतृत्व में आयोजित की गयी. जिसमें एनसीआरटी पाठ्यक्रम से मुगलकाल को हटाने का विरोध किया गया है.

जानकारी के अनुसार मंगलवार को हुई बैठक के बाद पार्टी के महासचिव प्रभास घोष ने एक बयान जारी कर कहा कि एनसीईआरटी के इस अति उद्देश्य प्रेरित निर्णय की कड़ी निंदा करते हैं. इसमें मुगलों और दिल्ली सल्तनत के सभी संदर्भों को हटाकर इसके स्थान पर राजवंशों पर एक अध्याय जोड़ा गया है जो तथाकथित हिंदुत्व-निर्धारित भारतीय लोकाचार को दर्शाता है. महाकुंभ और प्रमुख केंद्र सरकार की पहल का संदर्भ देता है और हिंदुत्व सिद्धांत से जुड़े दो ज्योतिर्लिंग, चार धाम यात्रा और शक्ति पीठों को पवित्र भूगोल के रूप में शामिल किया गया है. जो शिक्षा का भगवाकरण करने का एक स्पष्ट कदम है. मुगल सम्राट बाबर को एक आक्रमणकारी के रूप में ब्रांड किया गया है. लेकिन ब्रिटिश हमलावरों के बारे में ऐसा नहीं कहा गया है. इतिहास सामाजिक विकास के अध्यायों में अमिट सत्य के रूप में समाया हुआ है. इसे किसी शासक की मर्जी से मिटाया नहीं जा सकता. छात्रों को ऐतिहासिक तथ्यों से परिचित होने से वंचित करना और इसके बजाय उन्हें इतिहास के विकृत मनगढ़ंत संस्कार देना न केवल उन्हें पक्षपातपूर्ण चीजों से ब्रेनवॉश करने का कदम है. बल्कि सत्तारूढ़ शासन के घोर सांप्रदायिक हिंदुत्व एजेंडे को आगे बढ़ाने का भी एक तरीका है. देश के सभी शिक्षा-प्रेमी लोगों से आह्वान करते हैं कि वे शिक्षाविदों को सत्ताधारी पूंजीपति वर्ग और उसके गुलाम सेवकों के घृणित राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने के इस घिनौने खेल का कड़ा विरोध करें और छात्रों के हितों की रक्षा करें.

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By Shashi Kant Kumar

Shashi Kant Kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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