Patna News: (नितिश सिंह की रिपोर्ट)
पटना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार के कुख्यात दवा माफिया नीरज कुमार को हाजीपुर के कोन्हारा घाट से गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी पर पटना सहित कई जिलों में 15 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं. हाल के दिनों में बरामद हुई करोड़ों रुपये की नशीली दवाओं के नेटवर्क का वह मुख्य मास्टरमाइंड बताया जा रहा है.
हाजीपुर से गिरफ्तारी, दिल्ली भाग चुका था आरोपी
सूत्रों के अनुसार, पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि नीरज हाजीपुर में मौजूद है. छापेमारी के दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया गया. बताया जाता है कि पुलिस की कार्रवाई के बाद वह पहले दिल्ली भाग गया था, लेकिन नेटवर्क दोबारा सक्रिय करने के लिए हाजीपुर आया था, जहां से उसे दबोच लिया गया.
10 करोड़ की नशीली दवाओं के नेटवर्क का मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में सामने आया है कि पटना में करीब 10 करोड़ रुपये की नशीली दवाओं की बरामदगी के पीछे नीरज ही मास्टरमाइंड था. इसमें कोडीन कफ सिरप, नशीले इंजेक्शन और अन्य प्रतिबंधित दवाएं शामिल थीं. यह नेटवर्क पूरे बिहार में फैला हुआ था.
हिमाचल और उत्तराखंड से होती थी दवाओं की सप्लाई
जांच में यह भी सामने आया है कि नीरज लंबे समय से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की कंपनियों से दवाओं की खेप मंगवाकर बिहार में अवैध रूप से सप्लाई करता था. इसके बाद इन दवाओं को अलग-अलग जिलों में खपाया जाता था.
पटना पुलिस की बड़ी कार्रवाई से टूटा नेटवर्क
पटना पुलिस ने पहले ही नीरज के कई ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों की नशीली दवाएं बरामद की थीं. इसके बाद उसका पूरा नेटवर्क काफी हद तक ध्वस्त हो गया था. हालांकि वह फिर से अपने नेटवर्क को खड़ा करने की कोशिश में जुटा था.
हवाला कनेक्शन का भी खुलासा
ताजा जांच में नीरज के हवाला नेटवर्क से जुड़े होने का भी खुलासा हुआ है. पुलिस के अनुसार, वह अवैध दवा कारोबार से कमाए गए पैसों को हवाला के जरिए अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर करता था. करोड़ों रुपये के लेन-देन की जांच की जा रही है.
15 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज
नीरज के खिलाफ पटना के विभिन्न थानों में 15 से अधिक मामले दर्ज हैं. इनमें चित्रगुप्त नगर, अगमकुआं, गोपालपुर, रामकृष्ण नगर, मुसल्लहपुर और चौक थाना शामिल हैं. इन मामलों में पहले भी भारी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद की जा चुकी हैं.
20-25 साल से चल रहा था अवैध कारोबार
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, नीरज पिछले 20-25 वर्षों से इस अवैध दवा कारोबार में सक्रिय था. कई बार जेल जाने के बाद भी वह जमानत पर बाहर आकर फिर से इसी धंधे में लग जाता था.
जेल में हुई मुलाकात से बना पार्टनरशिप नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि नीरज और रविशंकर नामक व्यक्ति की मुलाकात जेल में हुई थी. इसके बाद दोनों ने मिलकर नशीली दवाओं का बड़ा नेटवर्क तैयार किया. इस गिरोह में कई अन्य लोग भी शामिल थे, जो पूरे बिहार में सप्लाई चेन संभालते थे.
ग्रामीण इलाकों में बने थे गोदाम
यह गिरोह ग्रामीण इलाकों में किराए पर मकान लेकर उन्हें गोदाम के रूप में इस्तेमाल करता था. वहां से ट्रांसपोर्ट के जरिए नशीली दवाओं की सप्लाई पूरे बिहार में की जाती थी.
सरकारी दवाओं की अवैध सप्लाई और रैकेट
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह सरकारी दवाओं को अवैध तरीके से खरीदकर अन्य राज्यों में भेजता था. बाद में उनके रैपर बदलकर और कीमत बढ़ाकर उन्हें असम, बांग्लादेश और अन्य जगहों पर सप्लाई किया जाता था.
रिमांड पर लेकर होगी गहन पूछताछ
पुलिस ने आरोपी नीरज को जेल भेज दिया है, लेकिन अब उसे रिमांड पर लेकर पूरे नेटवर्क, हवाला कनेक्शन और सप्लाई चेन की गहराई से जांच की जाएगी. अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं.
