महनार. महनार प्रखंड और नगर क्षेत्र दुर्गा पूजा की भक्ति और आस्था में सराबोर नजर आ रहा है. रविवार की रात चमरहरा वाली दुर्गा मैया का पट खुलते ही भक्तों ने जमकर जयकारा लगाया. माता के पट खुलते ही भक्तों पर मां की भक्ति का रंग साफ झलकने लगा. पट खोलने से पहले परंपरा अनुसार माता की सखियों को साड़ी पहनाने के लिए सैकड़ों महिलाएं घंटों कतार में खड़ी रहीं और श्रद्धापूर्वक साड़ी अर्पित की. इस दौरान पूरे गांव के लोग श्रद्धालुओं की सेवा में तत्पर नजर आए. मान्यता है कि साड़ी पहनाने वाली महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं और माता को सर्वप्रथम शीशकोहरे की बलि का प्रसाद ग्रहण कर ही उपवास तोड़ती हैं. चमरहरा दुर्गा मंदिर में पूजा बंगाली पद्धति से होती है, इसलिए यहां षष्ठी तिथि को ही माता की आंख (पट) खोली जाती है. जबकि महनार क्षेत्र के अन्य स्थानों पर माता की आंख अलग-अलग तिथियों को खोली जाती है. दशहरा की संध्या पर दुर्गा मैया की प्रतिमा का विसर्जन भव्य परंपरा के साथ होता है. विशालकाय प्रतिमा को भक्त अपने कंधों पर उठाकर माता रानी के जयकारे लगाते हुए पूरे गांव के देवी-देवताओं के दरबार में ले जाते हैं. विसर्जन से पूर्व हजारों महिलाएं परंपरा अनुसार माता को चावल-दुभि, बताशा और अपनी श्रद्धा के अनुसार राशि अर्पित करती हैं. विदाई का यह भावुक पल पूरे माहौल को भक्तिमय बना देता है.
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