घर बैठे हाजिरी बनाने वाली शिक्षिका पर उठे सवाल, जांच में सामने आई कई गड़बड़ी

Hajipur News: घर बैठे हाजिरी बनाने वाली शिक्षिका पर उठे सवाल, जांच में कई गड़बड़ी का खुलासा,पढिए पूरी खबर नीचे

Hajipur News: (राजीव कुमार सिंह) वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय कंचनपुर में कार्यरत एक शिक्षिका पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि शिक्षिका विभागीय नियमों को ताक पर रखकर घर बैठे ही ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रही थीं, जबकि कभी-कभार विद्यालय पहुंचकर ऑफलाइन हाजिरी भी बना लेती थीं.

मामले का खुलासा तब हुआ जब गोरौल थाना क्षेत्र के चैनपुर निवासी रंजना सिंह ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत विद्यालय की शिक्षिका अर्चना कुमारी की ऑनलाइन एवं ऑफलाइन उपस्थिति से संबंधित सत्यापित दस्तावेज प्राप्त किए। दस्तावेजों में ऑनलाइन और ऑफलाइन हाजिरी के समय में अंतर पाया गया। साथ ही ऑनलाइन उपस्थिति का लोकेशन अधिकतर शिक्षिका के घर चैनपुर, गोरौल क्षेत्र को दर्शा रहा है.

बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है.

नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

विभागीय सूत्रों के अनुसार शिक्षिका अर्चना कुमारी की नियुक्ति वर्ष 2006 में पंचायत राज लोदीपुर में शिक्षा मित्र के पद पर हुई थी। आरोप है कि यह नियुक्ति पूरी तरह नियम विरुद्ध तरीके से की गई। बताया गया कि नियुक्ति प्रक्रिया समाप्त होने के बाद 10 जुलाई 2006 को उनका आवेदन स्वीकार किया गया और उसी दिन योगदान भी कराया गया.

गौरतलब है कि तत्कालीन शिक्षा विभाग के निदेशक मदन मोहन झा के कार्यकाल में 1 जुलाई 2006 से शिक्षा मित्र पद समाप्त कर दिया गया था। इसके बावजूद बाद की तारीख में नियुक्ति और योगदान होने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.

जनप्रतिनिधियों ने भी उठाया मामला

वैशाली के विधायक सिद्धार्थ पटेल ने भी शिक्षिका की नियुक्ति को अवैध बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। वहीं सांसद वीणा देवी ने वर्ष 2025 में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा था कि शिक्षिका की नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा अभिलेख और स्थानांतरण आवेदन में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं.

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि प्रखंड एवं जिला स्तर की जांच में नियुक्ति अवैध होने की पुष्टि हुई है, इसके बावजूद विभागीय कार्रवाई नहीं होने से सरकारी राजस्व की क्षति हो रही है और नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है.

विभागीय कार्रवाई लंबित

सूत्रों का कहना है कि कई शिकायतों और विभागीय शोकॉज नोटिस के बावजूद शिक्षिका नियमित रूप से वेतन प्राप्त कर रही हैं. मामले को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं.

इस संबंध में बीपीआरओ सह प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी निशांत कुमार ने बताया कि शिक्षिका को शोकॉज किया गया था। उनका जवाब प्राप्त हो चुका है, जिसे आगे की कार्रवाई के लिए जिला शिक्षा कार्यालय भेज दिया गया है.

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Published by: Vivek Pandey

विवेक रंजन पाण्डेय पिछले 8 वर्षों से टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने Aryabhatta Knowledge University, Patna से BJMC की पढ़ाई की है.

उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Network 10 टीवी चैनल से की. इसके बाद News India, News18 Digital सहित कई राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग और कंटेंट राइटिंग का अनुभव प्राप्त किया.

वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में Content Writer के रूप में कार्यरत हैं. यहां बिहार की राजनीति, चुनाव, शिक्षा, कृषि, रोजगार, सरकारी योजनाओं, सामाजिक सरोकारों और विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों पर तथ्यपरक और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं.

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