डेंगू से बचाव के लिए हर सातवें दिन निभाएं सामाजिक जिम्मेदारी : डॉ गुड़िया

सदर अस्पताल सिविल सर्जन कार्यालय में शुक्रवार को डेंगू पर एक मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया.

हाजीपुर. सदर अस्पताल सिविल सर्जन कार्यालय में शुक्रवार को डेंगू पर एक मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में, स्वास्थ्य अधिकारियों ने मीडियाकर्मियों को डेंगू के कारणों, लक्षणों, और रोकथाम के तरीकों के बारे में जानकारी दी गयी. जिला वीबीडीसी पदाधिकारी डॉ गुड़िया कुमारी ने डेंगू पर मीडिया कार्यशाला के दौरान कहा कि अभी का समय डेंगू के लिए काफी अहम है. इन्होंने बताया कि यह एक वायरल रोग है, जो संक्रमित मादा एडिस मच्छर के काटने से होता है. इन्होंने कहा कि फिलहाल इस बीमारी के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है, ऐसे में बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है.

बरसात के मौसम में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है. आने वाला एक से डेढ़ महीना डेंगू के प्रसार से अहम है. यह वह समय है जब तापमान और नमी के कारण साफ पानी में डेंगू के लार्वा ज्यादा पनपते हैं. यह लार्वा एक हफ्ते में ही मच्छर के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं. इससे डेंगू का खतरा बढ़ जाता है, अगर हम सामाजिक रूप से यह नियम बना लें कि हफ्ते में एक दिन अपने घर के आस-पास के छोटे कंटेनर का पानी उलट दें या निकाल दें, तो लार्वा को पनपने से रोका जा सकता है. डेंगू से कैसे बचें इस पर अभी ज्यादा बात करने की जरूरत है. इनके मच्छर साफ पानी में पनपते हैं और ज्यादातर दिन में ही काटते हैं. डेंगू के लिए सदर में 10, अनुमंडलीय अस्पताल में पांच तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो, मच्छरदानी सहित बेड का स्पेशल वार्ड तैयार किया गया है. यहां 24 घंटे चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध है. डेंगू बुखार से आसानी से बचाव किया जा सकता है, लेकिन सही कदम उठाने के बाद भी डेंगू के किसी प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं, तो खुद से दवा लेने की भूल न करें और फौरन डॉक्टर से परामर्श लें.

डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा टेस्ट ही मान्य

डॉ गुडिया ने बताया कि डेंगू की पुष्टि के लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एनएस जांच किट उपलब्ध है. पॉजिटिव आने पर सदर अस्पताल में एलाइजा टेस्ट से उसकी पुष्टि होती है. सदर अस्पताल में सभी तरह की दवाएं मौजूद है. पॉजिटिव आने पर उस घर के आस पास के करीब 100 मीटर के दायरे में फॉगिंग की जाती है.

इस वर्ष 2 केस हुए प्रतिवेदित : डॉ गुड़िया कुमारी ने बताया कि वर्ष 2024 में कुल 324 केस प्रतिवेदित हुए थे. वहीं इस वर्ष अभी तक दो केस प्रतिवेदित हुए हैं. दोनों ही मरीज ठीक होकर अपने घर जा चुके है. यह मामले पिछले वर्ष से काफी कम है. यह सिर्फ जागरूकता के कारण ही संभव हो पाया है. इस मौके पर वीडीसीओ राजीव कुमार, वीबीडीसी धीरेंद्र कुमार, कुमारी राधा, सीफार समन्वयक अमित कुमार सिंह, पिरामल पीएल पियूष कुमार एवं मीडिया कर्मी मौजूद थे.

डेंगू बुखार के लक्षण क्या है : पेट दर्द, सिर दर्द, उल्टी, नाक से खून बहना, पेशाब या मल में खून आना, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, तेज बुखार, थकावट, सांस लेने में दिक्कत, गंभीर मामलों में प्लेटलेट काउंट कम होना.

क्या डेंगू से बचा जा सकता है : सही समय पर उचित कदम उठाने से डेंगू बुखार से आसानी से बचाव किया जा सकता है. डेंगू से बचने के लिए नीचे बताए गए उपाय किये जा सकते हैं.

मच्छरदानी का उपयोग करें.

घर में या आसपास पानी जमा न होने दें.

कूलर का पानी रोज बदलें.

पूरे बाजू के कपड़े पहने.

मच्छर से बचने वाले रिप्लेंट, क्रीम या कॉयल का प्रयोग करें.

पेड़ पौधों के पास जाएं या घर के बाहर निकलें तो शरीर को ढक कर जूते मोजे पहन कर निकलें.

पानी की टंकी को ढक कर रखें.

कीटनाशक और लार्वा नाशक दवाइयों का छिड़काव करें.

अपने घर के आसपास साफ सफाई बनाए रखने में जागरूकता फैलाएं.

स्वस्थ खान पान वाली जीवनशैली अपनाएं, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अच्छी बनी रहे.

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Author: AMLESH PRASAD

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