डाल्फिन के संरक्षण में मददगार होंगे मछुआरे

राज्य सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तत्वावधान में वन्य प्राणी सप्ताह के तहत सोमवार को राष्ट्रीय डाल्फिन दिवस मनाया गया. वैशाली वन प्रमंडल की ओर से शहर के रामचौरा मंदिर परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया. मौके पर मछुआरों को डाल्फिन संरक्षण के लिए प्रशिक्षण दिया गया.

मिला प्रशिक्षण हाजीपुर. राज्य सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तत्वावधान में वन्य प्राणी सप्ताह के तहत सोमवार को राष्ट्रीय डाल्फिन दिवस मनाया गया. वैशाली वन प्रमंडल की ओर से शहर के रामचौरा मंदिर परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया. मौके पर मछुआरों को डाल्फिन संरक्षण के लिए प्रशिक्षण दिया गया. कार्यक्रम में राष्ट्रीय डाल्फिन रिसर्च सेंटर, पटना के निदेशक डा गोपाल शर्मा मुख्य अतिथि तथा एसएनएस कालेज, हाजीपुर के जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डा सत्येंद्र कुमार विशिष्ट अतिथि थे. वन प्रमंडल के रेंज ऑफिसर रंजीत कुमार एवं फारेस्ट गार्ड सहित लगभग सौ लोगों की सहभागिता हुई. वन प्रमंडल पदाधिकारी अमित कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया. साथ ही बदलते परिवेश में बिहार सरकार एवं भारत सरकार को गंगा डॉल्फिन संरक्षण के लिए क्या-क्या कदम जा रहे हैं, इस पर विस्तार से चर्चा की. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डा गोपाल शर्मा ने डॉल्फिन पर उन्नत किस्म के शोध पर बल दिया. इन्होंने कहा कि विश्व में डाल्फिन सिर्फ भारतीय उप महाद्वीप में ही पाया जाता है. इन्हें बचाकर रखना हमारा दायित्व बनता है. विशिष्ट अतिथि डा सत्येंद्र कुमार ने कहा कि डाल्फिन को आम बोलचाल की भाषा में सोंस के नाम से जाना जाता है, जिसे आज भी लोग मछली समझते हैं. जबकि यह स्तनधारी प्राणी है. मछुआरों के लिए प्रशिक्षण मील का पत्थर साबित होगा. मछुआरे प्रशिक्षण लेकर डॉल्फिन के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान करेंगे. रेंजर रंजीत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया.

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Author: DEEPAK MISHRA

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