Hajipur News : बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप का डीएम ने लिया जायजा

राजा विशाल के गढ़ स्थल पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बन रहे बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह बुद्ध स्मृति स्तूप का डीएम यशपाल मीणा ने निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने मेडिटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, विजिटर हाॅल, गेस्ट हाउस, जलापूर्ति तथा तालाबों में स्वच्छ जल के संग्रहण आदि को लेकर पदाधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिये.

हाजीपुर. राजा विशाल के गढ़ स्थल पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बन रहे बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह बुद्ध स्मृति स्तूप का डीएम यशपाल मीणा ने निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने मेडिटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, विजिटर हाॅल, गेस्ट हाउस, जलापूर्ति तथा तालाबों में स्वच्छ जल के संग्रहण आदि को लेकर पदाधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. निरीक्षण के बाद उन्होंने भवन निर्माण विभाग के अभियंताओं, प्रोजेक्ट मैनेजर एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. मालूम हाे कि भगवान बुद्ध की पावन धरती वैशाली में अभिषेक पुष्करणी सरोवर के पास 72 एकड़ के भूखंड पर भगवान बुद्ध के स्मृति अवशेषों को सुरक्षित रखने एवं आमजनों के दर्शन के लिए बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप का निर्माण कराया जा रहा है. संग्रहालय का निर्माण कार्य अंतिम दौर में है. अब सिर्फ फिनिशिंग का काम बाकी रह गया है. निरीक्षण के दौरान डीएम ने कार्यरत एजेंसी को फिनिशिंग तथा साफ सफाई के काम में तेजी लाने का निर्देश दिया.

बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए होगा आकर्षण का केंद्र

बताया गया कि स्तूप का भव्य आर्किटेक्चर विश्व पटल पर अपनी अनोखी पहचान बनायेगा. यहां आने वाले पर्यटक भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन का अद्वितीय चित्रण एवं स्मृति चिन्हों का अवलोकन कर सकेंगे. स्तूप परिसर में पर्यावरण के दृष्टि से भी काफी काम किया गया है. इसके बनने के बाद यहां देश-विदेश से पर्यटक पहुंचेंगे और यह स्थान बौद्ध धर्मावलंबियों, इतिहास प्रेमियों एवं पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा. बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप का निर्माण भवन निर्माण विभाग द्वारा 4300 वर्ग मीटर भूखंड पर राजस्थान से मंगवाए गए गुलाबी पत्थरों से किया जा रहा है.

नहीं किया गया है चिपकाने वाले पदार्थ का प्रयोग

निर्माणाधीन बुद्ध स्मृति स्तूप का निर्माण काफी अलग तरीके से किया गया है. पत्थरों से बनी पूरी संरचना में दो पत्थरों को जोड़ने के लिए किसी प्रकार का गोंद या चिपकाने वाले पदार्थ का उपयोग नहीं किया गया है. बताया गया कि स्तूप की कुल ऊंचाई 33 मीटर है. इसका आंतरिक व्यास 38 मीटर तथा बाहरी व्यास 50 मीटर है. निरीक्षण के दौरान डीएम ने सभी विशेष कर फिनिशिंग के कार्य को तेजी से पूरा करने का निर्देश निर्माण एजेंसी को दिया है. यहां के संग्रहालय में गौतम बुद्ध से संबंधित रोचक घटनाओं के साथ बौद्ध धर्म से जुड़े प्रसंगों को भी दर्शाया जायेगा. निरीक्षण के दौरान पदाधिकारी तथा भवन निर्माण विभाग के वरीय अभियंता मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >