hajipur news. विदेशी पर्यटकों को लुभा रहा बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप

बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप को आम लोगों के लिए पिछले माह चालू किये जाने के बाद से इसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग आ रहे हैं

वैशाली. बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप को आम लोगों के लिए पिछले माह चालू किये जाने के बाद से इसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग आ रहे हैं. विदेशी पर्यटकों के लिए यह स्थल काफी आकर्षण का केंद्र बन गया है. विदेशी पर्यटक यहां आकर पूजा अर्चना कर रहे हैं.

थाई मंदिर के प्रधान पुजारी डॉ पीसी चंद्रा श्री ने बताया कि पर्यटकों को यहां आकर काफी सुकून मिल रहा है. स्तूप में बैठकर वे पूजा अर्चना कर वे पूरे विश्व में अमन-चैन की दुआ मांग रहे हैं. वहीं, मंदिर के व्यवस्थापक रवि किशन ने बताया कि बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय के निर्माण के बाद काफी संख्या में पर्यटक वैशाली आ रहे हैं.

मालूम हो कि 29 जुलाई को इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था. उद्घाटन के बाद परिसर में कुछ काम बाकी रह जाने से आम लोगों के लिये यह नहीं खुल सका था, जिस कारण वैशाली भ्रमण पर आने वाले सैलानी इसे देखने से वंचित हो जा रहे थे. 10 अक्तृबर को इसे आम लोगों के लिए खोला गया. हालांकि, अब तक सिर्फ विजिटर सेंटर एवं स्तूप को ही देखने के लिए खोला गया है. संग्रहालय में अब भी काम चल रहा है. वह कार्य पूरा होने पर जल्द ही सभी भागों को आम लोगों के लिए खोल दिया जायेगा.

72 एकड़़ में 550.48 करोड़ की लागत से बना है संग्रहालय एवं स्तूप

पूरे स्तूप और संग्रहालय परिसर का निर्माण भवन निर्माण विभाग द्वारा किया गया है. 72 एकड़ में फैले इस भव्य परिसर का निर्माण 550.48 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. संग्रहालय का मुख्य आकर्षण भगवान बुद्ध का पवित्र अस्थि कलश है, जो 1958 और 1962 के बीच हुई खुदाई के दौरान प्राप्त हुआ था. इस अस्थि कलश को संग्रहालय के पहली मंजिल पर श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया है. यह स्तूप अपने आप में एक अद्भुत वास्तुशिल्पीय चमत्कार है, जो पूरी तरह से पत्थरों से निर्मित है. इसमें अनूठी जीभ और नाली तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें राजस्थान के वंशी पहाड़पुर से सावधानीपूर्वक प्राप्त 42,373 बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. यह मज़बूत संरचना आधुनिक भूकंपरोधी तकनीकों से भी सुसज्जित है, जो इसकी दीर्घायु और सुरक्षा सुनिश्चित करती है.

मुख्य स्तूप और संग्रहालय के अलावा, इस परिसर में आगंतुकों और विद्वानों, दोनों के लिए सुविधाओं की एक विस्तृत श्रृंखला मौजूद है. इनमें एक समर्पित ध्यान केंद्र, एक सुसज्जित पुस्तकालय, एक आगंतुक केंद्र, एक संग्रहालय खंड, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक एम्फीथिएटर और एक कैफेटेरिया शामिल हैं. स्थायित्व के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाते हुए, इस परिसर में 500 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र और पर्याप्त पार्किंग सुविधाएं भी है.

ओडिशा के कलाकारों ने बनायी है भगवान बुद्ध की प्रतिमा

इस स्थल की एक विशिष्ट विशेषता ओडिशा के कुशल कलाकारों द्वारा तैयार की गई भगवान बुद्ध की प्रतिमा है, जिसके इस पवित्र स्थान की एक विशिष्ट पहचान बनने की उम्मीद है. बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप’ बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक बौद्ध विरासत में इसके योगदान का एक भव्य प्रतीक है. यह स्मारक न केवल वैशाली को विश्व बौद्ध मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन, संस्कृति और क्षेत्र के लिए रोजगार के अवसरों को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा. इस ऐतिहासिक स्थल के चालू होने से वैशाली में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे विश्व भर से तीर्थयात्री और पर्यटक आकर्षित होंगे, जिससे क्षेत्र में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक विकास भी होगा.

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Author: GOPAL KUMAR ROY

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