Deputy CM Vijay Kumar Chaudhary : हाजीपुर. पातेपुर के अति प्राचीन श्री राम जानकी मठ में आयोजित पांच दिवसीय झूलनोत्सव के आखिरी दिन भव्य पूजा अर्चना किया गया. झूलनोत्सव में शामिल होने के लिए बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी मंदिर परिसर पहुंचे. उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार एवं मंगलाचरण के बीच पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया. जिसके उपरांत मठाधीश बाबा विश्वमोहन दास जी महाराज ने डिप्टी सीएम का काफी गर्मजोशी से स्वागत किया.
बड़े महंत श्रीकांत शरण दास जी महाराज एवं बाबा विश्वमोहन दास जी महाराज ने संयुक्त रूप से पगड़ी, अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह भेंट किया. इस दौरान प्रमुख रेणु देवी एवं व्यापार मंडल अध्यक्ष गणेश राय ने डिप्टी सीएम को अंगवस्त्र से सम्मानित किया.
एक दूसरे को प्रेम करना सिखाता है धर्म
झूलनोत्सव में शामिल होने पहुंचे डिप्टी सीएम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पवित्र सावन मास के पूर्णिमा तिथि को पातेपुर के पवित्र धार्मिक स्थल जो बिहार में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे धार्मिक स्थल पर आना बड़े सौभाग्य की बात है. उन्होंने कहा कि जब से इस मठ में बाबा विश्वमोहन दास जी यहां का प्रबंधन देख रहे है तब से यहां धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में तेजी आई है.
यहां हर धार्मिक आयोजनों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. जो अपने आप में अनोखा है. इसका यहां से समाज पर भी बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है. डिप्टी सीएम ने कहा कि धर्म में कुछ भी नहीं है सिर्फ यहां एक दूसरे को प्रेम करना सिखाया जाता है.
विभिन्न धार्मिक स्थलों से काफी संख्या में जुटे है संत महात्मा
श्री राम जानकी मठ में आयोजित पांच दिवसीय झूलनोत्सव के अंतिम दिन काफी संख्या में कई राज्यों के प्रमुख धार्मिक स्थानों से साधु संतों की टोली शामिल होने पहुंचे है. जिससे पूरे क्षेत्र वैदिक मंत्रोच्चार एवं मंगलाचरण की ध्वनि से गुंजायमान हो रहा है.
चार सौ से अधिक वर्षों से चली आ रही है झूलनोत्सव की परंपरा
इस दौरान मठ के मठाधीश बाबा विश्वमोहन दास जी महाराज ने बताया कि मठ प्रांगण में झूलनोत्सव की परंपरा काफी प्राचीन है. यहां पिछले 437 वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है.
हर साल सावन मास के दसवीं तिथि से भगवान राम एवं जानकी जी का झूलनोत्सव प्रारंभ होकर पूर्णिमा तिथि को विशाल भंडारे के साथ समापन होता है. इस दौरान प्रथम दिन ठाकुर जी का झुलारोहण, दूसरे दिन हरिकृतन आरती, तीसरे दिन सामूहिक रामायण पाठ, चौथे दिन पौराणिक स्तुति पाठ, शास्त्रीय एवं सुगम संगीत तथा पांचवे एवं अंतिम दिन विशाल भंडारा का आयोजन किया जाता है.
