hajipur news. लोक अदालत में 1628 मामलों का निष्पादन, 3849030 रुपये का सेटलमेंट

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में शनिवार को वर्ष का चौथा एवं अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया

हाजीपुर. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में शनिवार को वर्ष का चौथा एवं अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. यह आयोजन सिविल कोर्ट परिसर में किया गया.

शिविर का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार मोहम्मद गयासुद्दीन, अवर न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार रितु कुमारी, जिला विधिक संघ के अध्यक्ष चंडी लाल दास तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सदस्य सह सचिव स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान के सुधीर कुमार शुक्ला ने संयुक्त रूप से किया.

अवर न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार रितु कुमारी ने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से कुल 1628 मामलों का निष्पादन किया गया तथा 3 करोड़ 84 लाख 90 हजार 30 रुपये की राशि का सेटलमेंट किया गया.

धन की होती है बचत

इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 26 हजार 651 मामले चिह्नित किए गए हैं. इनमें न्यायालयों में लंबित 7 हजार 866 मामले तथा 18 हजार 785 पूर्व विवाद वाद शामिल हैं. उन्होंने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का सुलह-समझौते के माध्यम से संबंधित पक्षकारों की सहमति से सरल एवं सुलभ तरीके से निस्तारण करना है. इससे समय, धन और संसाधनों की बचत होती है तथा कोर्ट फीस की भी वापसी होती है.

आपसी सहमति से होता है मामले का निष्पादन

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि लोक अदालत में किसी मामले का निस्तारण आपसी सहमति से हो जाता है तो उसके विरुद्ध किसी प्रकार की अपील नहीं होती है. लोक अदालत समाजिक व्यवस्था एवं व्यक्तिगत हित में अत्यंत उपयोगी है. उन्होंने पक्षकारों एवं विशेष रूप से उपस्थित बैंक अधिकारियों से अधिक से अधिक मामलों के निष्पादन में रुचि लेने का अनुरोध किया और लोक अदालत को भारतीय संविधान के उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में सफल बताया.

मामलों के निस्तारण के लिए कुल 32 बेंचों का गठन किया गया था. इन बेंचों में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय ऋषि कुमार सिंह, जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवीन कुमार ठाकुर, उमेश कुमार शर्मा, अभिषेक कुणाल, राजीव रंजन सिंह, दिलीप कुमार, रमेश कुमार, न्यायिक पदाधिकारी रजनी कुमारी, अभिमन्यु कुमार, प्रिया शेखर, अंकित जायसवाल, प्रमोद कुमार, विमलेश कुमार, रंजन कुमार सिंह, राजीव पांडे, गजाला तस्लीम, शिव श्रुतिका, रूपा राज, मोहम्मद सलीकुर रहमान, राहुल दत्ता, नाजिम अहमद, प्रमोद कुमार, अनुराग मिश्रा, कुंदन कुणाल, राकेश रंजन, सुजाता कुमारी, अंजलि कपूर, पीयूष प्रसन्न, हरि प्रिया, शबनम एवं संदीप साहिल शामिल थे. इनके द्वारा सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण किया गया.

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