Gopalganj News: जिले के बरौली नगर परिषद में सशक्त स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को आयोजित की गई. बैठक में आंतरिक खींचतान खुलकर सामने आ गई, जब उप मुख्य पार्षद (उप चेयरमैन) संजय कुमार उपाध्याय और सदस्य अशोक मांझी बैठक में शामिल नहीं हुए. हालांकि, शेष तीन सदस्यों और कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) की मौजूदगी से कोरम पूरा कर लिया गया और बैठक की कार्यवाही संपन्न की गई:
- उपस्थित सदस्य: मधुकर कुमार, जितेंद्र प्रसाद, सीमा देवी और ईओ.
- अनुपस्थित सदस्य: उप चेयरमैन संजय कुमार उपाध्याय और अशोक मांझी.
बैठक से पहले उप चेयरमैन ने ईओ को लिखा पत्र, मांगी वित्तीय जानकारियां
बैठक में शामिल न होने से पहले उप चेयरमैन संजय कुमार उपाध्याय ने कार्यपालक पदाधिकारी को एक औपचारिक पत्र सौंपा. पत्र में उन्होंने पूर्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बैठक से दूरी बनाने का कारण स्पष्ट किया:
- विवरण की मांग: फरवरी 2026 से लेकर अब तक की सभी बैठकों की कार्यवाही, विभिन्न मदों में आवंटित व उपलब्ध राशि का पूरा लेखा-जोखा.
- टेंडर व भुगतान की स्थिति: हाल के महीनों में निकाले गए विकास योजनाओं के टेंडरों, बकाया राशि और अब तक किए गए भुगतानों का संपूर्ण विवरण मांगा गया.
- पहले भी उठ चुकी है मांग: इससे पूर्व 1 अगस्त को सदस्य मधुकर कुमार और अशोक कुमार द्वारा भी इन्हीं वित्तीय विवरणों की मांग की जा चुकी है.
क्या कहता है सशक्त स्थायी समिति का कोरम नियम?
बिहार नगरपालिका सशक्त स्थायी समिति कार्य संचालन नियमावली, 2010 के तहत बैठक के लिए स्पष्ट वैधानिक प्रावधान तय हैं:
- कोरम की अनिवार्यता: नियमावली के नियम 6 के अनुसार, नगर परिषद की साधारण बैठक के संचालन हेतु कम से कम 3 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है, जबकि आपातकालीन बैठक के लिए न्यूनतम 4 सदस्यों का होना जरूरी है.
- बैठक स्थगन का नियम: यदि निर्धारित समय से आधे घंटे के भीतर आवश्यक कोरम पूरा नहीं होता, तो अध्यक्ष को बैठक को अगली तिथि के लिए स्थगित करने का अधिकार है.
आपसी खींचतान से विकास कार्य बाधित होने की चिंता
कोरम के आधार पर भले ही प्रशासनिक तौर पर बैठक पूरी कर ली गई हो, लेकिन शीर्ष जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी और असंतोष से स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है.
"सशक्त स्थायी समिति नगर परिषद के विकास और नीतिगत निर्णयों की रीढ़ होती है. यदि महत्वपूर्ण बैठकों में सदस्य गैरहाजिर रहेंगे और आंतरिक गतिरोध जारी रहेगा, तो नगर की विकास योजनाओं, बजट आवंटन और टेंडर प्रक्रियाओं पर सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा. नगर परिषद के चहुंमुखी विकास के लिए सभी सदस्यों की सर्वसम्मति और अधिकारियों का पारदर्शी रुख बेहद जरूरी है."
