मात्र तीन महीने में ही टूट गयी नहर, किसानों के खेतों में भरने लगा पानी

बरौली. प्रखंड के दक्षिणांचल से होकर गुजरने वाली सारण कैनाल नहर से कहला और सरेयां नरेन्द्र के बीच से एक छोटी सी नहर निकलती है, जो किसानों के खेतों की सिंचाई के काम आती है.

बरौली. प्रखंड के दक्षिणांचल से होकर गुजरने वाली सारण कैनाल नहर से कहला और सरेयां नरेन्द्र के बीच से एक छोटी सी नहर निकलती है, जो किसानों के खेतों की सिंचाई के काम आती है. पूर्व में यह नहर केवल गड्ढे के रूप में था और देखने में ऐसा लगता था जैसे थोड़ी नीची कोई सड़क हो. इसी नहर से किसान बैलगाड़ी तथा ट्रैक्टर आदि लेकर खेतों में जाते थे. इस नहर की लंबाई चार किमी है, जो सरेयां नरेन्द्र से निकल कर कौआ टोला, मथुरापुर, चकमंझन आदि गांव से होकर माधोपुर में धमई नदी में मिल जाती है. करीब तीन माह पहले विभाग का ध्यान इस नहर की ओर गया और इसका पक्कीकरण कराया गया. पक्कीकरण कराने के समय भी ग्रामीणों ने इस नहर में इसके ऊपर से गुजरने के लिए किसी तरह का पुल या सीढ़ी नहीं बनाये जाने पर आक्रोश व्यक्त किया था. पक्कीकरण होने से ग्रामीणों में आस जगी कि इस नहर के पानी से उनके खेतों को पानी मिलेगा लेकिन यह नहर इतनी कमजोर बना दी गयी कि मात्र एक बार की तेज बारिश में एक ओर का किनारा धंस गया और नहर का सारा पानी खेतों में बहने लगा. सरेयां नरेन्द्र के किसानों विनोद यादव, सेराज आलम, मो. सलामत, सुजान, मो. सहमोद्दीन, मकसूद आलम, असगर आलम, इब्राहीम, नूर होदा, मो. आशिक, फिरोज आलम आदि को जब इसकी जानकारी मिली, तो वे नहर पर पहुंचे तथा नहर की दशा देख कर आक्रोशित हो गये. किसानों का कहना था कि नहर पक्कीकरण कराते समय इसमें प्राक्कलन के अनुसार काम संवेदक के द्वारा नहीं कराया गया है, जिसका नतीजा ये हुआ कि नहर पहली बारिश में ही धंस कर टूट गयी. अब नहर का सारा पानी हम किसानों के खेत में जमा हो रहा है और अधिक पानी जमा होने से फसल मारी भी जा सकती है. ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी संवेदक पर कठोर कार्रवाई करते हुए पुन: उसे प्राक्कलन के अनुसार नहर पक्कीकरण करने का आदेश दिया जाये और फसल क्षति का मुआवजा भी दिलवाया जाये.

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Author: SANJAY TIWARI

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