Sasamusa Sugar Mill Revival: गोपालगंज जिले की प्रसिद्ध सासामुसा चीनी मिल को फिर से चालू कराने और किसानों के बकाये पैसों के भुगतान के लिए गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बिहार विधानसभा में आश्वासन दिया है.
विधानसभा की पहली पाली में बुधवार को प्रस्ताव के जरिए जदयू विधायक मंजीत कुमार सिंह समेत अन्य सदस्यों ने इस मिल को नीलाम होने से बचाने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की. इसके साथ ही मोतिहारी चीनी मिल को भी बचाने और वहां के किसानों को उनका हक दिलाने का मुद्दा जोर-शोर से उठा.
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने मंत्री को संबंधित विधायकों के साथ बैठक कर जल्द उचित फैसला लेने की सलाह दी, जिस पर मंत्री ने अपनी सहमति जताई. वर्तमान में बिहार की करीब 18 चीनी मिलें बंद पड़ी हैं, जिन्हें दोबारा चालू कराने की मांग विधायकों ने रखी.
सासामुसा चीनी मिल पर करोड़ों का बकाया, नीलामी रोकने की उठी मांग
विधायक मंजीत सिंह ने सदन में आंकड़े रखते हुए बताया कि सासामुसा चीनी मिल पर स्थानीय किसानों का लगभग 43 करोड़ रुपये और कर्मचारियों का 9.50 करोड़ रुपये बकाया है. इसके अलावा मिल पर बैंक का कर्ज करीब 68.40 करोड़ रुपये है.
मिल में रखी चीनी की बिक्री से 12.5 करोड़ रुपये मिले थे, जिसे सबसे पहले किसानों को दिया जाना चाहिए था. लेकिन राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) ने वह राशि बैंक को दिला दी. मंत्री ने जवाब में बताया कि 12 जुलाई को NCLT में इस मामले पर सुनवाई तय है और किसानों के बकाये भुगतान के लिए 43 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं.
10 हजार किसानों का भविष्य दांव पर
विधायकों ने चिंता जाहिर की कि साढ़े चार साल से बंद पड़ी सासामुसा मिल से 10 हजार से अधिक किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है. NCLT ने मिल के प्लांट और मशीनरी की निविदा मात्र 17.64 करोड़ रुपये में कर दी है, जबकि मिल की 80 प्रतिशत मशीनें बिल्कुल सही और चालू हालत में हैं.
सदस्यों ने कहा कि एक नए उद्यमी बैंक का 60 करोड़ रुपये चुकाकर मिल को दोबारा चलाने के लिए पूरी तरह उत्सुक हैं. ऐसे में सरकार को आगे आकर मिल की मशीनों को कटने और बिकने से हर हाल में बचाना होगा.
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मोतिहारी चीनी मिल पर 27 साल से लंबित हैं 12 सर्टिफिकेट केस
सदन में मोतिहारी चीनी मिल का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. इस मिल पर किसानों का 17.41 करोड़ रुपये बकाया है, जिसके लिए दर्ज 12 सर्टिफिकेट केस पिछले 27 सालों से लंबित पड़े हैं.
सदस्यों ने याद दिलाया कि हाईकोर्ट ने साल 2017 में ही जिलाधिकारी और गन्ना उद्योग विभाग को बकाये की वसूली कर किसानों को भुगतान कराने का सख्त निर्देश दिया था. लेकिन इसके बाद भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है, जिससे किसानों में गहरा रोष है.
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