gopalganj news : गोपालगंज. राजेश कुमार ग्रेजुएट हैं. उनको जब अपने देश में नौकरी नहीं मिली, तो कंसलटेंसी के कार्य के लिए एजेंट ने कुवैत में बेहतर पैकेज दिलाने के लिए झांसा दिया. राजेश ने उसे विदेश भेजने के लिए अपना पासपोर्ट व 1.20 लाख रुपये कर्ज लेकर दे दिया.
दो वर्षों तक चक्कर लगाने के बाद जब विदेश नहीं गये, तो अब पैसा वापस लेने के लिए चक्कर लगा रहे हैं. यह अकेले राजेश ही नहीं उनके जैसे सैकड़ों युवा फ्रॉड के शिकार होकर ठोकरें खा रहे हैं. अपने घर में रोटी नहीं मिलने के कारण गोपालगंज से प्रतिमाह 10-15 हजार युवा विदेश में जाते हैं. विदेश भेजने के नाम पर प्रतिमाह 50 से 60 युवा ठगी के शिकार हो रहे हैं. विदेश भेजने के नाम पर उनसे फ्रॉड किया जाता है. कुछ तो कर्ज लेकर विदेश जाने के लिए एजेंटों, एजेंसियों के पास रुपये जमा कर देते हैं. उसके बाद चक्कर काटते रहते हैं. कुछ तो अपने प्रभाव के दम पर अपना पैसा वापस ले लेते हैं, लेकिन अधिकतर लोग थाने व कोर्ट का चक्कर लगाने को मजबूर हो जाते हैं. कई पीड़ित अपनी राशि तक गवांकर घर बैठ जाते हैं. पुलिस को मिलने वाली शिकायतों को देखते हुए विदेश मंत्रालय भी गंभीर हो गया है. विदेश मंत्रालय के पोर्टल पर मिलने वाली शिकायतों को लेकर जब गोपालगंज पुलिस ने जांच की तो महज पांच एजेंसियां ही विदेश मंत्रालय से रजिस्टर्ड मिलीं, जिसका सूची पुलिस कप्तान अवधेश दीक्षित ने जारी करते हुए बाकी एजेंट व एजेंसियों से बचने की सलाह दी है.विदेश भेजने वाले संदिग्ध एजेंसियों पर निगरानी
पुलिस कप्तान ने बताया कि विदेश भेजने वाले लगभग 30 से अधिक एजेंट व एजेंसियों को चिह्नित किया गया है, जो विदेश मंत्रालय से बगैर रजिस्टर्ड होकर भी जिले के युवाओं को गुमराह कर ठगी कर रही हैं. उनकी पूरी सूची तैयार कर ली गयी है. संबंधित थानों को निर्देश दिया गया है कि वे उनपर निगरानी रखें. जैसे ठोस साक्ष्य मिले तत्काल कार्रवाई करें.स्मार्ट पैकेज का लालच देकर कोरिया व थाइलैंड भेजे जा रहे युवा
विदेश में स्मार्ट सेलरी का झांसा देकर युवाओं को अपनी जाल में फंसाकर चीन, पाकिस्तान की अवैध एजेंसियों को ले जाकर बेच दिया जा रहा है. पिछले साल एनआइए की जांच में गोपालगंज का लिंक सामने आया था, जिसमें चीन व पाकिस्तान से संचालित रैकेट के लिए काम करने वाली कंपनी के एजेंटों से इनका संपर्क है. उनसे एक युवा के लिए दो से तीन हजार डॉलर रुपये लेकर यहां से युवकों को सप्लाइ कर दे रहे. संयुक्त अरब अमीरात, कोरिया, थाइलैंड, वियतनाम, लाओस एसइजेड में युवाओं को लाओस, गोल्डन ट्रायंगल एसइजेड और कोरिया सहित अन्य स्थानों पर फर्जी कॉल सेंटरों में ऑनलाइन फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया गया, जैसे क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, नकली एप्लिकेशन का उपयोग करके क्रिप्टो मुद्रा में निवेश, हनी ट्रैपिंग के जरिये भारत के ही लोगों को टारगेट किया जा रहा था. अब जांच में सफेदपोश रैकेट का खुलासा होने के बाद पुलिस एक्शन मोड में है.फ्रॉड होने पर यहां करें शिकायत
विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी (फ्रॉड) की शिकायत आप नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर ऑनलाइन या हेल्पलाइन 1930 डायल करके कर सकते हैं. साथ ही स्थानीय पुलिस स्टेशन में एफआइआर दर्ज कराएं और अपने बैंक को सूचित करें, ताकि पैसे वापस मिल सके. इसके अलावा, विदेश मंत्रालय (एमइए) की विजिलेंस साइट और eConsumer.gov पर भी शिकायत की जा सकती है.युवाओं को सजग होकर कार्य करने की एसपी ने दी सलाह
विदेश जाने से पहले हर युवा को जांच-परख के बाद ही एजेंटों को राशि व पासपोर्ट देना चाहिए. जो एजेंसी विदेश मंत्रालय से रजिस्टर्ड न हो, उनसे बचने की जरूरत है. अगर कोई फ्रॉड करता है, तो सीधे पोर्टल या पुलिस में शिकायत करे, ताकि उचित कार्रवाई हो सके.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
