Pappu Pandey: जान मारने की नीयत से फायरिंग करने के करीब सात साल पुराने मामले में बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश-3 सह एमपी/एमएलए विशेष कोर्ट के न्यायाधीश रजेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में कुचायकोट के जदयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय समेत तीन आरोपितों के खिलाफ आरोप गठित किया गया. मामले में विधायक के बड़े भाई सतीश पांडेय तथा पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष और उनके भतीजे मुकेश पांडेय के खिलाफ भी आरोप गठित हुआ है. आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब मामले की सुनवाई साक्ष्य के चरण में आगे बढ़ेगी.
2019 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
मीरगंज थाना क्षेत्र के नयागांव तुलसिया सिंह टोला निवासी स्व. वशिष्ठ तिवारी की पत्नी फूलमती कुंवर ने वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि उनके पुत्र अभिमन्यु तिवारी पर जान मारने की नीयत से फायरिंग की गयी थी.
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी. अनुसंधान के दौरान पुलिस ने घटना से जुड़े तथ्यों, साक्ष्यों और आरोपों की पड़ताल की. जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित लोगों से पूछताछ करने के साथ मामले में उपलब्ध साक्ष्यों को भी खंगाला.
जांच के बाद तीनों के खिलाफ दायर हुआ आरोप पत्र
कांड के अनुसंधान के बाद पुलिस ने मामले में तीनों आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. इसके बाद मामला विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंचा.
बुधवार को विशेष न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी की गयी. अदालत की इस कार्रवाई के बाद अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों तथा अन्य साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा.
अब अभियोजन पक्ष पेश करेगा साक्ष्य
आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किये जायेंगे. गवाहों के बयान दर्ज होंगे और बचाव पक्ष की ओर से उनसे जिरह भी की जाएगी. इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी.
अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किये जाने वाले साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी करेगी.
आरोप गठन का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं
किसी मामले में अदालत द्वारा आरोप गठित किया जाना आरोपित के दोषी साबित होने के बराबर नहीं होता. आरोप गठन के बाद मुकदमे की नियमित सुनवाई शुरू होती है, जिसमें अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य और गवाह पेश करने होते हैं.
इसके बाद बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलता है. इसलिए इस मामले में भी तीनों आरोपितों को अदालत के अंतिम फैसले तक दोषी नहीं माना जा सकता. मामले में अंतिम निर्णय सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत करेगी.
पुराने फायरिंग मामले ने फिर पकड़ी रफ्तार
जदयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय से जुड़े पुराने फायरिंग मामले में आरोप गठन के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है. करीब सात साल पुराने इस मामले में अब न्यायिक प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गयी है.
पप्पू पांडेय गोपालगंज के कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक हैं. उनके खिलाफ अतीत में कई आपराधिक मामले चर्चा में रहे हैं. वर्ष 2020 में रूपनचक ट्रिपल मर्डर मामले में भी उनका नाम सामने आया था. हालांकि, रूपनचक मामला और मौजूदा फायरिंग मामला अलग-अलग हैं और दोनों की कानूनी स्थिति को एक साथ जोड़कर देखना उचित नहीं होगा.
2026 के जमीन विवाद मामले में भी जांच तेज
विधायक से जुड़ा एक अलग जमीन विवाद और कथित फायरिंग का मामला वर्ष 2026 में सामने आया. इस मामले में करीब 16 एकड़ से अधिक जमीन को लेकर विवाद की बात सामने आयी थी. प्राथमिकी में विधायक अमरेंद्र पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और अन्य लोगों के नाम सामने आने की रिपोर्ट है.
इस मामले की जांच राज्य सरकार ने सीआईडी को सौंपने का फैसला किया है. जमीन विवाद से जुड़े मामले में फायरिंग और जमीन पर कब्जे से संबंधित आरोप भी लगाए गये हैं.
रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से विधायक पक्ष को फिलहाल अंतरिम राहत भी मिली है. ऐसे में 2026 के जमीन विवाद मामले और मौजूदा सात साल पुराने फायरिंग केस की कानूनी स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है.
रूपनचक मामले से भी अलग है मौजूदा केस
पप्पू पांडेय से जुड़े मामलों की चर्चा में वर्ष 2020 का रूपनचक ट्रिपल मर्डर मामला भी सामने आता रहा है. उस मामले में विधायक के भाई सतीश पांडेय और भतीजे मुकेश पांडेय को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जबकि विधायक का नाम प्राथमिकी में शामिल किया गया था.
हालांकि, मौजूदा फायरिंग मामला वर्ष 2019 में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है और इसकी सुनवाई अलग न्यायिक प्रक्रिया के तहत हो रही है. इसलिए अलग-अलग मामलों के आरोप, साक्ष्य और कानूनी स्थिति को मिलाकर देखना सही नहीं होगा.
विधायक पक्ष ने 2026 के मामले में आरोपों को बताया बेबुनियाद
वर्ष 2026 में सामने आये जमीन विवाद मामले में विधायक पक्ष की ओर से आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया गया है. इस मामले में जांच की प्रक्रिया अलग से चल रही है.
वहीं, सात साल पुराने फायरिंग मामले में बुधवार को अदालत द्वारा आरोप गठित किये जाने के बाद अब मुकदमे की सुनवाई साक्ष्य के चरण में आगे बढ़ेगी.
अब आगे क्या होगा
तीनों आरोपितों के खिलाफ आरोप गठन के बाद अब अभियोजन पक्ष अपने गवाह और साक्ष्य अदालत के सामने पेश करेगा. गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद बचाव पक्ष को उनसे जिरह का अवसर मिलेगा.
इसके बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत मामले में आगे की कार्रवाई करेगी. करीब सात साल पुराने इस मामले में आरोप गठन के बाद अब सबकी नजर आगामी सुनवाई पर रहेगी.
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