Gopalganj News : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच उचकागांव प्रखंड की 14 पंचायतों में परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीण इलाकों में चर्चा तेज हो गयी है. पंचायतों और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण से कई क्षेत्रों का मौजूदा भूगोल बदल सकता है. इसका असर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संभावित प्रत्याशियों की चुनावी तैयारियों पर भी पड़ने की संभावना है.
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायत परिसीमन 2026 के तहत GIS मैपिंग और जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के सत्यापन की प्रक्रिया चलायी जा रही है. आयोग के अनुसार परिसीमन का उद्देश्य पंचायतों, वार्डों, पंचायत समिति और जिला परिषद के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है.
पंचायत और वार्ड की सीमाओं में हो सकता है बदलाव
परिसीमन के दौरान पंचायत, वार्ड और अन्य निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का नये सिरे से निर्धारण किया जाना है. जनसंख्या के आंकड़ों और क्षेत्रीय सीमाओं के आधार पर नक्शों में आवश्यक सुधार भी किये जा रहे हैं. आयोग की ओर से अगस्त और सितंबर में GIS मैप, राजस्व गांव और 2011 की जनगणना के आंकड़ों से संबंधित सुधार के लिए लगातार निर्देश जारी किये गये हैं.
ऐसे में जिन जनप्रतिनिधियों या संभावित प्रत्याशियों का प्रभाव किसी खास पंचायत या वार्ड तक सीमित रहा है, उन्हें संभावित बदलाव के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है. नये क्षेत्रों के पंचायत या वार्ड में शामिल होने की स्थिति में वहां के मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने की जरूरत भी सामने आ सकती है.
पुराने चुनावी समीकरणों पर भी पड़ेगा असर
परिसीमन के कारण किसी पंचायत के क्षेत्र या वार्ड की सीमा बदलती है, तो वहां के मौजूदा सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं. इसी वजह से स्थानीय स्तर पर संभावित प्रत्याशी नये क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने में जुटे हैं.
हालांकि अभी अंतिम परिसीमन सामने नहीं आया है. इसलिए किसी पंचायत या वार्ड की वास्तविक स्थिति को लेकर अभी अंतिम तस्वीर स्पष्ट नहीं है. राज्य निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया में दावा-आपत्ति और अन्य चरणों के बाद अंतिम सीमाओं की तस्वीर स्पष्ट होगी.
नये क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने में जुटे दावेदार
संभावित बदलाव को देखते हुए कई जनप्रतिनिधि और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदार अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों के साथ आसपास के गांवों में भी संपर्क बढ़ा रहे हैं. पंचायत स्तर पर लोगों से मुलाकात और स्थानीय मुद्दों की जानकारी लेने का सिलसिला भी तेज हुआ है.
परिसीमन के बाद किस पंचायत में कौन-सा क्षेत्र शामिल होगा और किस वार्ड की सीमा किस तरह निर्धारित होगी, इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ेगा. अंतिम प्रारूप और उसके बाद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा क्षेत्रीय समीकरण किस रूप में बदलते हैं.
अंतिम प्रकाशन के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर
फिलहाल परिसीमन की प्रक्रिया में नक्शों और जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के सत्यापन का काम जारी है. राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर 2011 की जनगणना आधारित पंचायत परिसीमन और GIS मैपिंग से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध करायी गयी है.
इसलिए अभी किसी पंचायत या निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम सीमा को लेकर दावा करना जल्दबाजी होगी. अंतिम प्रकाशन के बाद ही उचकागांव की 14 पंचायतों में क्षेत्रीय बदलाव और चुनावी समीकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आयेगी.
