Gopalganj News: कुचायकोट प्रखंड के भठवा, सिसवा, करमैनी समेत दर्जनों गांवों में जलजमाव की समस्या एक बार फिर किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है. लगातार जलभराव के कारण सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूब गई है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जलनिकासी के रास्तों पर अतिक्रमण और पुल के मुहाने के बंद होने के बावजूद प्रशासन समय पर कार्रवाई नहीं कर सका, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
तीन साल से अटकी है अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए पिछले तीन वर्षों से कुचायकोट अंचल कार्यालय में फाइल लंबित है. करीब एक वर्ष पहले सरकारी अमीन ने प्रभावित क्षेत्रों की नापी भी की थी, लेकिन अब तक उसकी रिपोर्ट अंचल कार्यालय में जमा नहीं हो सकी है. किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक सुस्ती और कागजी प्रक्रिया के कारण हर वर्ष उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं.
नए सीओ ने किया निरीक्षण, जल्द कार्रवाई का दिया भरोसा
बीडीसी प्रतिनिधि बिपुल सिंह की पहल पर सोमवार को कुचायकोट के नए अंचल अधिकारी मनोरंजन शुक्ला ने भठवा, कुचायकोट बाजार और बघौच रोड स्थित जलजमाव एवं अतिक्रमण प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने स्थानीय दुकानदारों और सब्जी विक्रेताओं को आवश्यक निर्देश भी दिए.
निरीक्षण के बाद अंचल अधिकारी ने आश्वासन दिया कि चिन्हित स्थानों से जल्द अतिक्रमण हटाकर जलनिकासी की व्यवस्था बहाल की जाएगी, ताकि लोगों को जलजमाव की समस्या से राहत मिल सके.
किसानों ने बयां किया दर्द
प्रभावित किसानों ने कहा कि हर साल बाढ़ और जलजमाव से उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है. अधिकारियों द्वारा केवल निरीक्षण और आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता. किसानों का कहना है कि यदि समय रहते पुल का मुहाना साफ कर जलनिकासी की व्यवस्था कर दी जाती, तो सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद होने से बच सकती थी.
स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाने, पुल के मुहाने को तत्काल साफ कराने और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसानों को इस तरह के नुकसान का सामना न करना पड़े.
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