गोपालगंज के कुचायकोट थाने में ऐतिहासिक सती पूजा की तैयारी पूरी, धोती-कुर्ता में यजमान बनेंगे पुलिसकर्मी

कुचायकोट थाने में 18वीं सदी से चली आ रही मां सती की वार्षिक पूजा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. इस अनूठे आयोजन में पुलिसकर्मी धोती-कुर्ता में नजर आएंगे और 30 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. पूजा के बाद आधी रात तक महाभंडारा चलेगा और स्कूल परिसर में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होगा.

Kuchaykot Sati Puja: यूपी-बिहार सीमा पर स्थित कुचायकोट थाना परिसर में ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा के तहत इस वर्ष भी मां सती की वार्षिक पूजा धूमधाम से आयोजित की जाएगी. सावन पूर्णिमा के अवसर पर होने वाले इस अनूठे आयोजन को लेकर पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोगों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. पूजा के दौरान पुलिसकर्मी खाकी वर्दी छोड़कर पारंपरिक धोती-कुर्ता में नजर आएंगे. वहीं, थानाध्यक्ष मुख्य यजमान की भूमिका निभाएंगे.

इस ऐतिहासिक पूजा में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, आसपास के थानों के थानाध्यक्ष और पूर्व में यहां पदस्थापित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल होते हैं. इस बार पूजा में करीब 25 से 30 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है.

पूजा के बाद आधी रात तक चलेगा महाभंडारा

आयोजन को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. थानाध्यक्ष से लेकर चौकीदार तक तैयारियों में जुटे हुए हैं. दिन में मां सती की मुख्य पूजा-अर्चना के बाद विशाल महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा. महाभंडारा आधी रात तक चलने की संभावना है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे.

थाना परिसर में जगह की कमी, स्कूल परिसर में होगी सांस्कृतिक संध्या

थाना परिसर में जगह की कमी को देखते हुए इस बार रात्रि सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुचायकोट बालक के प्रांगण में किया जाएगा. कार्यक्रम में पंजाब के सुप्रसिद्ध कलाकार दिलबेर मेहदी, दिल्ली के पॉप सिंगर और महिला गायिका अपनी प्रस्तुतियां देंगी. सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर भी लोगों में उत्साह है.

18वीं सदी से जुड़ी है मां सती पूजा की परंपरा

स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार, मां सती पूजा की यह परंपरा 18वीं सदी से जुड़ी है. मान्यता है कि उस समय कवल यादव नामक एक किसान की सर्पदंश से मौत हो गयी थी. उनकी पतिव्रता पत्नी पति का शव गोद में लेकर प्रार्थना करने बैठीं. इसी दौरान स्वतः चिता प्रज्वलित हो गयी. इसके बाद इस स्थान को शक्तिपीठ मानकर मां सती की पूजा शुरू की गयी.

अंग्रेज थानेदार ने रोकने की कोशिश की थी पूजा

स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1936 में जब कुचायकोट थाना स्थापित हुआ, तब एक अंग्रेज थानेदार ने इस पूजा को रोकने का प्रयास किया था. इसके बाद इलाके में कई अनहोनी घटनाएं होने की बात कही जाती है. इसके बाद अंग्रेज अधिकारी को भी इस परंपरा के आगे झुकना पड़ा. तभी से कुचायकोट थाने में पदस्थापित होने वाला प्रत्येक थानाध्यक्ष इस पूजा की परंपरा को निभाता आ रहा है.

2004 में कराया गया था मंदिर का जीर्णोद्धार

वर्ष 2004 में तत्कालीन थानाध्यक्ष रामसागर राय ने थाना परिसर स्थित मां सती मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार कराया था. इसके बाद मंदिर और पूजा आयोजन को और व्यवस्थित रूप दिया गया.

श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर प्रशासन सतर्क

थानाध्यक्ष दर्पण सुमन ने बताया कि पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं. श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं. आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है.

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By संजय कुमार अभय

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