gopalganj news : गोपालगंज. केरल पुलिस हथुआ में छापेमारी कर मुरेड़ा गांव के तबरेज अहमद नाम के एक युवक को अरेस्ट कर ले गयी है, जो हाल ही में कोरिया से लौटकर आया था. हथुआ में बैठकर केरल के एक प्रभावशाली को डिजिटल अरेस्ट कर लाखों रुपये मंगा लिया था.
पुलिस फिलहाल कुछ भी बताने से इंकार कर रही है. युवक को अरेस्ट कर केरल पुलिस अपने साथ ले गयी. अब इस मामले की जांच जब गोपालगंज पुलिस ने की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये. उसे स्मार्ट पैकेज का लालच देकर थाइलैंड के रास्ते कोरिया भेजा गया, जहां उससे जबरिया साइबर फ्रॉड कराया जाता था. लौटने के बाद वह डिजिटल अरेस्ट की घटना को अंजाम दिया. खुलासा होने के बाद गोपालगंज पुलिस एक्शन में आ गयी है. इस कार्य को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को एसपी अवधेश दीक्षित ने साइबर डीएसपी अवंतिका दिलीप कुमार को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है. साथ ही सभी थानाध्यक्षों को अपने-अपने थाना क्षेत्र में पूर्व में साइबर अपराध में संलिप्त रहे आरोपितों की सूची तैयार कर शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.एसपी ने स्पष्ट कहा है कि इसमें केवल जिले के ही नहीं, बल्कि जिले से बाहर के रहने वाले ऐसे साइबर अपराधियों का भी डाटा शामिल किया जायेगा. जो गोपालगंज से जुड़े मामलों में संलिप्त पाये गये हैं. पुलिस सूत्रों ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात, कोरिया, थाइलैंड, वियतनाम, लाओस एसइजेड में युवाओं को लाओस, गोल्डन ट्रायंगल एसइजेड और कंबोडिया सहित अन्य स्थानों पर फर्जी कॉल सेंटरों में ऑनलाइन फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया गया, जैसे क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, नकली एप्लिकेशन का उपयोग करके क्रिप्टो मुद्रा में निवेश, हनी ट्रैपिंग के जरिये भारत के ही लोगों को टारगेट किया जा रहा था. वहां से लौटने वाले युवा जो महीनों, वर्षों तक उनके लिए काम कर चुके हैं, वे अब पुलिस की रडार पर हैं. उनके द्वारा यहां लौटने पर डिजिटल अरेस्ट की घटना को अंजाम दिया जा रहा है. पुलिस कप्तान अवधेश दीक्षित ने बताया कि जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में रहने वाले वैसे साइबर अपराधी, जो पूर्व में साइबर ठगी सहित अन्य साइबर अपराधों के मामलों में आरोपित रह चुके हैं उनकी डोजियर तैयार की जा रही है. पुलिस का मानना है कि इस पहल से साइबर अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी व भविष्य में होने वाले अपराधों को रोका जा सकेगा.
डोजियर में शामिल होगी पूरी कुंडली
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डोजियर में साइबर अपराधियों का पूरा आपराधिक इतिहास अंकित किया जायेगा. इसमें उनका नाम, पता, थाना क्षेत्र, दर्ज मामलों का विवरण, अपराध करने का तरीका, मोबाइल नंबर, बैंक खाता, सोशल मीडिया गतिविधियां व नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की जानकारी शामिल रहेगी. डोजियर तैयार होने के बाद उसे जिले के सभी थानों में उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि के दौरान पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने में आसानी हो.
क्या है डोजियर
पुलिस एक्सपर्ट ने बताया कि डोजियर किसी व्यक्ति, घटना या विषय से संबंधित दस्तावेजों और जानकारी का एक व्यवस्थित संग्रह होता है, जिसे खास उद्देश्य के लिए इकट्ठा किया जाता है, जैसे कानूनी मामलों, जांच, या दवा उत्पाद के अनुमोदन के लिए इसमें विवरण, तथ्य और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होते हैं, जो एक संपूर्ण फाइल के रूप में होते हैं.
पुलिस को मिलेगी मदद
साइबर अपराधियों की डोजियर तैयार होने के बाद पुलिस को कई स्तर पर लाभ मिलेगा. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि साइबर अपराध में पूर्व से संलिप्त रहे अपराधियों पर लगातार और प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी. किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत यह जांच कर सकेगी कि संबंधित व्यक्ति का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं. डोजियर के माध्यम से अपराधियों के अपराध करने के तरीकों, उनके नेटवर्क और इस्तेमाल किये जाने वाले साधनों की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध रहेगी. इससे नये साइबर ठगी के मामलों की जांच में समय की बचत होगी और पुलिस तेजी से सही दिशा में कार्रवाई कर सकेगी. बार-बार अपराध करने वाले आरोपितों की पहचान आसान होने से उनकी गिरफ्तारी भी शीघ्र संभव होगी.
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