Gopalganj News : जिले के सभी प्रारंभिक एवं मध्य विद्यालयों में शनिवार को समावेशी शिक्षा के तहत 'हमारा हर बच्चा महत्वपूर्ण' थीम पर अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (पीटीएम) का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लिया. शिक्षकों ने बच्चों की पढ़ाई, नियमित उपस्थिति, सीखने के स्तर और विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी अभिभावकों को दी. वहीं, जिला स्तर से प्रतिनियुक्त अधिकारियों ने विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण कर कार्यक्रम की निगरानी की.
बच्चों की शैक्षणिक प्रगति पर हुई विस्तृत चर्चा
पीटीएम के दौरान शिक्षकों ने प्रत्येक छात्र की शैक्षणिक प्रगति, विषयवार प्रदर्शन, नियमित उपस्थिति और व्यवहार संबंधी जानकारी अभिभावकों के साथ साझा की. साथ ही अभिभावकों से बच्चों को घर पर पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने, नियमित रूप से विद्यालय भेजने और समय-समय पर शिक्षकों से संपर्क बनाए रखने की अपील की गई.
अभिभावकों के सुझावों पर भी किया गया विचार
कई विद्यालयों में अभिभावकों ने बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय व्यवस्था को लेकर अपने सुझाव भी दिए. शिक्षकों ने इन सुझावों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया और विद्यालय तथा अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया.
समावेशी शिक्षा की अवधारणा से कराया गया अवगत
कार्यक्रम में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष चर्चा की गई. अभिभावकों को समावेशी शिक्षा की अवधारणा, सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और सभी बच्चों को समान अवसर देने के प्रयासों की जानकारी दी गई. शिक्षकों ने कहा कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता अलग होती है और उसे उसी के अनुरूप सीखने का अवसर मिलना चाहिए.
सभी 14 प्रखंडों में अधिकारियों ने किया निरीक्षण
उचकागांव, हथुआ, थावे, कुचायकोट, सिधवलिया, बरौली, बैकुंठपुर, भोरे, विजयीपुर, कटेया, गोपालगंज, पंचदेवरी और फुलवरिया सहित जिले के सभी 14 प्रखंडों में प्रतिनियुक्त अधिकारियों ने विद्यालयों का निरीक्षण किया. कार्यक्रम से संबंधित जानकारी गूगल शीट पर ऑनलाइन अपलोड की गई. साथ ही विद्यालयों से फोटो और वीडियो निर्धारित व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए गए, ताकि जिला स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग की जा सके.
विद्यालय और अभिभावकों के बीच संवाद बढ़ाने की पहल
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के पीटीएम का उद्देश्य विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना, बच्चों की पढ़ाई में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाना और प्रत्येक बच्चे के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है. विभाग ने उम्मीद जताई कि ऐसे आयोजनों से बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में और सुधार होगा.
