गोपालगंज से विकास दुबे की रिपोर्ट
Gopalganj News : गोपालगंज जिले में संचालित अनुदानित संस्कृत और मदरसा विद्यालयों की जमीनी हकीकत जानने के लिए चलाये गये विशेष जांच अभियान की रिपोर्ट तैयार कर शिक्षा विभाग को भेज दी गयी है. जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार की ओर से गठित टीमों ने जिले के 13 संस्कृत विद्यालयों और 12 मदरसा विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण कर वहां की शैक्षणिक व्यवस्था, छात्र-छात्राओं की उपस्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता और आधारभूत सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया गया. जांच के दौरान जुटाये गये तथ्यों, फोटो साक्ष्य और अधिकारियों के मंतव्य को रिपोर्ट में शामिल किया गया है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर यह जांच ऐसे समय में करायी गयी है, जब अनुदानित शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई और संसाधनों की वास्तविक स्थिति को लेकर लगातार निगरानी बढ़ायी जा रही है. सरकार का मानना है कि जिन विद्यालयों को सरकारी सहायता और वेतनानुदान दिया जा रहा है, वहां बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है या नहीं, इसकी समय-समय पर समीक्षा जरूरी है.
बीडीओ, बीईओ और प्रधानाध्यापक ने की जांच
डीईओ ने बताया कि विद्यालयों की जांच के लिए प्रखंड स्तर पर त्रिसदस्यीय समिति बनायी गयी थी. इस समिति में संबंधित प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) तथा प्रखंड मुख्यालय स्थित किसी राजकीय या राजकीयकृत माध्यमिक अथवा उच्च माध्यमिक विद्यालय के वरीय प्रधानाध्यापक को शामिल किया गया था. टीम ने विद्यालयों में पहुंचकर अभिलेखों और वास्तविक स्थिति का मिलान किया.
छात्र हैं या सिर्फ कागज पर नाम, इसकी भी हुई पड़ताल
निरीक्षण के दौरान टीमों ने छात्र-छात्राओं की वास्तविक उपस्थिति की जांच की. नामांकन पंजी, उपस्थिति पंजी और कक्षा संचालन की स्थिति का मिलान किया गया. कई जगह बच्चों से पढ़ाई से जुड़े सवाल भी पूछे गये, ताकि यह पता चल सके कि विद्यालयों में नियमित रूप से शिक्षण कार्य हो रहा है या नहीं. शिक्षकों की उपस्थिति और उनकी कार्यप्रणाली का भी आकलन किया गया.
भवन, शौचालय, पुस्तकालय और लैब की भी स्थिति देखी गयी
जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रही. टीम ने विद्यालय भवन, कक्षाओं, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशाला, कार्यालय, प्रधानाध्यापक कक्ष और शौचालयों का भी निरीक्षण किया. विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, भवन की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किस प्रकार हो रहा है, इसकी भी जानकारी ली गयी. निरीक्षण के दौरान विभिन्न बिंदुओं की तस्वीरें लेकर उन्हें रिपोर्ट के साथ संलग्न किया गया.
भूमि और शिक्षकों के अभिलेखों की भी जांच
टीमों ने विद्यालयों के नाम उपलब्ध भूमि, स्थापना वर्ष, यू-डायस कोड, मान्यता और अनुदान से जुड़े अभिलेखों की भी जांच की. इसके अलावा स्वीकृत पदों के मुकाबले कार्यरत शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों की संख्या का सत्यापन किया गया. संबंधित बोर्ड और विभाग से प्राप्त अनुमोदन संबंधी दस्तावेजों का भी मिलान किया गया.
त्रिसदस्यीय रिपोर्ट पर होगी विभागीय समीक्षा
जांच पूरी होने के बाद सभी 25 विद्यालयों की रिपोर्ट जिला शिक्षा विभाग के माध्यम से शिक्षा विभाग को भेज दी गयी है. विभागीय स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. जिन विद्यालयों में किसी प्रकार की कमी या अनियमितता सामने आयेगी, वहां सुधारात्मक कदम उठाये जा सकते हैं. शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी संस्था पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, शिक्षक नियमित रूप से कार्य करें और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग विद्यार्थियों के हित में हो. जांच रिपोर्ट से जिले के संस्कृत और मदरसा विद्यालयों की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है.
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