Gopalganj News: (सत्येंद्र पांडेय) विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गोपालगंज व्यवहार न्यायालय परिसर में वृहत पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिला विधिज्ञ संघ और वन विभाग के सहयोग से आयोजित इस अभियान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गीता गुप्ता सहित न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों ने मिलकर कुल 1001 पौधे लगाए.
कार्यक्रम के लिए सभी पौधे वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए थे. पौधारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया गया.
आने वाली पीढ़ी के लिए पौधारोपण जरूरी: गीता गुप्ता
पौधारोपण अभियान की शुरुआत करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गीता गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. वर्तमान समय में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए.
उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे ही आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, सुरक्षित पर्यावरण और बेहतर भविष्य प्रदान कर सकते हैं. इसलिए पौधारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है.
न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने निभाई सक्रिय भूमिका
न्यायालय परिसर को हरा-भरा बनाने के इस अभियान में जिले के कई न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. इस अवसर पर जिला न्यायाधीश प्रथम संजीव कुमार सिंह, द्वितीय कैलाश जोशी, तृतीय राजेंद्र पांडेय, चतुर्थ राजेश कुमार वर्मा, पंचम अमित कुमार पाण्डेय, विशाल कुमार एवं संतोष कुमार दुबे, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) भारती कुमारी, एसीजेएम प्रतीक आनंद द्विवेदी और शोभना त्रिपाठी सहित कई न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे.
इसके अलावा बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष धीरेन्द्र मिश्रा, पूर्व महासचिव मनोज कुमार मिश्रा, पूर्व उपाध्यक्ष रवि प्रकाश मणि त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों ने भी पौधारोपण में हिस्सा लिया.
‘ग्रीन कैंपस’ बनाने का लिया संकल्प
डीएफओ मेघा यादव ने बताया कि लगाए गए पौधों में छायादार, फलदार और औषधीय प्रजातियों के पौधे शामिल हैं. आने वाले वर्षों में ये पौधे न्यायालय परिसर को एक “ग्रीन कैंपस” का स्वरूप प्रदान करेंगे.
कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने पौधों की नियमित देखरेख, सिंचाई और संरक्षण का संकल्प लिया ताकि लगाए गए पौधे सुरक्षित रूप से विकसित हो सकें.
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