Gopalganj News: जिले में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने जा रही है. करीब 28 करोड़ रुपये के निवेश से जिले में कई नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना होगी, जिससे लगभग 300 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है. यह जानकारी जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इनवेस्टर मीट, सिंगल विंडो क्लियरेंस कमेटी तथा विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं की समीक्षात्मक बैठक में दी गई.
बैठक में उद्यमियों, जिला उद्योग केंद्र, बियाडा, बिजली विभाग, भवन निर्माण विभाग तथा विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इस दौरान जिले में प्रस्तावित प्लास्टिक रिसाइक्लिंग प्लांट, सीबीजी प्लांट, मैट्रेस निर्माण इकाई और फिल्म प्लाइवुड परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई. अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जिले में लगभग 28 करोड़ रुपये का निवेश होगा तथा करीब 300 नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे.
उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर
बैठक में महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र द्वारा पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज (बीआईपीपी-2025), सिंगल विंडो क्लियरेंस प्रणाली और बियाडा की भूमि उपलब्धता से संबंधित जानकारियां दी गईं. उद्यमियों को उद्योग स्थापना से जुड़ी सुविधाओं और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के बारे में भी अवगत कराया गया.
उद्यमियों ने रखीं अपनी समस्याएं
बैठक के दौरान उद्यमियों ने उद्योग स्थापना और संचालन में आ रही विभिन्न समस्याओं को जिला पदाधिकारी के समक्ष रखा. इनमें बैंक ऋण स्वीकृति, भूमि आवंटन, बिजली कनेक्शन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे शामिल थे. जिला पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित समाधान का निर्देश दिया.
लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश
समीक्षा बैठक में पीएमईजीपी, पीएमएफएमई और पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत स्वीकृति एवं भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की गई. लंबित मामलों पर नाराजगी जताते हुए जिला पदाधिकारी ने सभी बैंकों के जिला समन्वयकों को मामलों की पुनः जांच कर शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. साथ ही चालू वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा.
जिले के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
नए उद्योगों की स्थापना से न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि जिले में औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे आर्थिक विकास के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
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