गोपालगंज के एसएमडी इंटर कॉलेज में ₹1 करोड़ वित्तीय गबन की जांच का अंतिम दिन, समिति के सामने नहीं आईं प्रिंसिपल

Gopalganj News: गोपालगंज के कुचायकोट स्थित एसएमडी इंटर कॉलेज में करीब ₹1 करोड़ की वित्तीय अनियमितता मामले की जांच के आखिरी दिन (18 मई) प्राचार्या निभा तिवारी उपस्थित नहीं हुईं. इससे पहले प्राचार्या ने सारा दोष लिपिक वीरेंद्र राय पर मढ़ा था। सोमवार को रिटायर्ड लिपिक वीरेंद्र राय ने जांच समिति को लिखित आवेदन देकर बताया कि प्राचार्या जांच को भटका रही हैं और उनके पास कोई कागजात नहीं है. लिपिक ने प्राचार्या द्वारा अपनी मां की बीमारी के बहाने को भी झूठा बताया, क्योंकि उनकी माता का निधन 2013 में ही हो चुका है.

Gopalganj News(विकास दुबे): जिले के कुचायकोट प्रखंड अंतर्गत एसएमडी इंटर कॉलेज में हुए करीब एक करोड़ रुपये की भारी वित्तीय अनियमितता  के मामले की जांच सोमवार को एक बेहद नाटकीय और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई. जांच समिति द्वारा साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तय की गई अंतिम तिथि (18 मई) को भी कॉलेज की प्रिंसिपल निभा तिवारी समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुईं. वहीं, इस मामले में घसीटे जा रहे कॉलेज के क्लर्क ने लिखित आवेदन देकर प्रिंसिपल पर जांच को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है.

अंतिम तिथि पर परिवादी जुटे, लेकिन प्रिंसिपल रही नदारद

जांच समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 18 मई को साक्ष्य और पक्ष रखने का आखिरी मौका मुकर्रर किया था. इस तय तिथि पर मामले से जुड़े सभी परिवादी (शिकायतकर्ता) अपने-अपने पुख्ता दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ जांच समिति के सामने उपस्थित हुए. सभी को उम्मीद थी कि आज कॉलेज प्रबंधन की ओर से भी वित्तीय रिकॉर्ड पेश किए जाएंगे, लेकिन प्राचार्या (प्रिंसिपल) निभा तिवारी स्वयं उपस्थित नहीं हुईं.

बीमारी और मौत के बहानों का खुला खेल, रिटायर्ड क्लर्क का बड़ा खुलासा

इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब कॉलेज के सेवानिवृत्त लिपिक (क्लर्क) वीरेंद्र राय ने जांच समिति को एक लिखित आवेदन सौंपकर प्राचार्या के दावों की हवा निकाल दी.

दरअसल, पूर्व की सुनवाइयों के दौरान प्राचार्या निभा तिवारी ने जांच समिति को लिखित तौर पर बताया था कि वित्तीय मामलों से जुड़े सभी आवश्यक अभिलेख और साक्ष्य लिपिक वीरेंद्र राय के पास हैं. इसके लिए पहले क्लर्क की माता की तबीयत खराब होने का हवाला देकर समय मांगा गया, और फिर दूसरी तिथि पर खुद क्लर्क की अस्वस्थता का बहाना बनाकर जांच से मोहलत ली गई थी.

सोमवार को क्लर्क वीरेंद्र राय ने समिति के सामने आकर जो खुलासे किए, उसने सबको चौंका दिया, उन्होंने बताया कि उनकी माता का निधन वर्ष 2013 में ही हो चुका है. ऐसे में वर्ष 2026 की जांच में उनकी माता की बीमारी का हवाला देकर समय मांगना पूरी तरह से मनगढ़ंत और जांच को टालने की कोशिश थी. वीरेंद्र राय ने स्पष्ट किया कि वे वर्ष 2025 में ही सेवामुक्त (सेवानिवृत्त) हो चुके हैं.  सेवानिवृत्ति के समय या उससे पहले उन्हें इस वित्तीय मामले से संबंधित किसी प्रकार का प्रभार कभी नहीं सौंपा गया.

कॉलेज के अन्य कर्मचारियों पर दोष मढ़ने का आरोप

लिपिक के इस तीखे आवेदन के बाद जांच समिति के सामने अब यह साफ हो गया है कि कॉलेज प्रशासन जांच में सहयोग करने से बच रहा है. परिवादियों का कहना है कि एक करोड़ रुपये के इस सरकारी और शैक्षणिक फंड के गबन को छुपाने के लिए लगातार तारीखें बढ़वाई जा रही थीं. अब जबकि जांच की अंतिम तिथि भी समाप्त हो चुकी है, यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच समिति प्राचार्या के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करती है.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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