Gopalganj News: (संजय अभय) सूरीनाम में भारतीय आगमन दिवस के उपलक्ष्य में “गिरमिटिया देशों में हिंदी पत्रकारिता एवं साहित्य का सामाजिक आंदोलन, स्वतंत्रता, शिक्षा एवं संस्कृति में योगदान” विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन सत्र गुरुवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के केएन उडुप्पा सभागार में आयोजित किया गया.
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग तथा ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन का शुभारंभ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं कुलगीत के साथ हुआ.
हिंदी भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों की वाहक
सम्मेलन के संयोजक एवं आयोजन सचिव प्रो. ज्ञानप्रकाश मिश्र ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता और जीवन मूल्यों की वाहक है. विषय प्रवर्तन करते हुए अरविंद पांडेय ने कहा कि गिरमिटिया देशों में हिंदी पत्रकारिता सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रभावी माध्यम रही है.
प्रवासी भारतीयों ने बचाए रखीं अपनी सांस्कृतिक जड़ें
मुख्य वक्ता प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने कहा कि गिरमिटिया श्रमिकों का इतिहास संघर्ष, संस्कृति, भाषा और आत्मसम्मान की गौरवगाथा है. उन्होंने बताया कि वर्ष 1834 से भारतीयों का प्रवास मॉरीशस, सूरीनाम, फिजी, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा गुयाना जैसे देशों में हुआ, जिनमें बड़ी संख्या बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों की थी.
उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय अपने साथ भोजपुरी, अवधी, मैथिली, मगही और ब्रज भाषाओं के साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं भी लेकर गए. इनकी छाप आज भी उन देशों की भाषाओं, संस्कृति और जीवनशैली में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. प्रो. आनंद ने कहा कि हिंदी ने गिरमिटिया देशों में भारतीय पहचान और सांस्कृतिक जड़ों को बचाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
लोकतांत्रिक मूल्यों की सशक्त वाहक है हिंदी पत्रकारिता
विशिष्ट अतिथि प्रो. संजय गुप्ता ने हिंदी पत्रकारिता को लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया. वहीं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े शारदानंद हरिनंदन ने भारत में गिरमिटोलॉजी अध्ययन शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया.
अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुषमा ढिल्डियाल ने कहा कि हिंदी विश्व समुदाय को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण शक्ति बनकर उभर रही है.
पत्रकार संजय कुमार अभय हुए सम्मानित
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन बृजेश पांडेय ने किया. इस अवसर पर पत्रकार संजय कुमार अभय को सम्मानित भी किया गया.
सम्मेलन में प्रो. भुवाल राम, प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, प्रो. विद्योत्तमा मिश्र, प्रो. विनोद पांडेय, प्रो. ओंकार नाथ उपाध्याय, प्रो. देवब्रत चौबे, चंद्रशेखर मिश्र, डॉ. राजेश राय, कमलेश सिंह, डॉ. बाला लखेन्द्र, रंजीत राय, महर्षि अनिल शास्त्री, मनजीत त्रिपाठी, डॉ. अमित तिवारी, डॉ. पंकज शुक्ला और राकेश तिवारी सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद एवं विद्वान उपस्थित रहे.
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