(गोपालगंज से संजय कुमार अभय)
Gopalganj News: बिहार के प्रसिद्ध सिद्धपीठ थावे स्थित मां सिंहासनी मंदिर के प्रशासनिक भवन निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं और खर्च में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.
मंदिर न्यास समिति के सदस्यों द्वारा निर्माण कार्य और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है. जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य और खर्च में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं.
तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन
डीएम द्वारा गठित जांच समिति में स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के कार्यपालक अभियंता, मंदिर न्यास समिति के सदस्य दिलीप सिंह तथा पुजारी-सह-सदस्य पंडित संजय पांडेय को शामिल किया गया है. समिति को निर्देश दिया गया है कि वह निर्माण कार्य, किए गए भुगतान और शेष देय राशि की समीक्षा कर विस्तृत प्रतिवेदन सौंपे, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके.
भवन के सामने मिट्टी भराई पर 9.27 लाख रुपये खर्च का आरोप
मंदिर परिसर में बने प्रशासनिक भवन के सामने मिट्टी भराई पर लगभग 9.27 लाख रुपये खर्च किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. समिति के कुछ सदस्यों का कहना है कि इस मद में दर्शाई गई राशि अत्यधिक प्रतीत होती है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है.
रंग-रोगन और अन्य कार्यों में 27 लाख रुपये खर्च पर उठे सवाल
भवन की पेंटिंग, शौचालय निर्माण, सीढ़ियों पर टाइल्स लगाने, ग्रील की प्राइमर व पेंटिंग तथा नल लगाने जैसे कार्यों पर लगभग 27 लाख रुपये खर्च दिखाए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है. मंदिर समिति के कुछ सदस्यों का आरोप है कि मां के दरबार में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई है और खर्च का ब्योरा संदेह के घेरे में है.
10 लाख रुपये का भुगतान, शेष राशि लंबित
सूत्रों के अनुसार, मंदिर समिति के पूर्व निर्णय के आधार पर भवन निर्माण प्रमंडल से समन्वय स्थापित कर प्राक्कलन तैयार किया गया था और स्थानीय एजेंसी श्री बालाजी कंपनी से कार्य कराया गया. इसके एवज में लगभग 10 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष राशि के भुगतान की प्रक्रिया अभी लंबित है.
बताया जा रहा है कि भुगतान और निर्माण कार्यों को लेकर भी समिति के भीतर मतभेद उभरे हैं, जिसके बाद मामले की जांच कराने का निर्णय लिया गया है.
जांच रिपोर्ट के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मंदिर प्रशासनिक भवन के निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा को तेज कर दिया है. अब सभी की निगाहें डीएम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं. रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा.
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