Gopalganj News:(vikash) गोपालगंज जिले के शिक्षा विभाग कार्यालय का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है. वायरल वीडियो में कुछ लोग कार्यालय के भीतर फाइलों के बीच बैठकर नोट गिनते और आपस में रुपये बांटते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं और जिलेभर में इसकी चर्चा हो रही है.
वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं
बताया जा रहा है कि वीडियो में शिक्षा विभाग के प्रधान लिपिक राजेंद्र राम, एक शिक्षक, कंप्यूटर ऑपरेटर और डीपीओ स्थापना के चालक मुन्ना कुमार समेत कुछ अन्य लोग नजर आ रहे हैं. टेबल पर फाइलों के साथ नोटों की गड्डियां रखी दिखाई दे रही हैं. कुछ लोग रुपये गिनते दिख रहे हैं, जबकि अन्य बातचीत करते नजर आ रहे हैं. हालांकि, अभी तक वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता की जांच की जा रही है. वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने शिक्षा विभाग में संभावित भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. आम लोगों के बीच चर्चा है कि सरकारी कार्यालय के भीतर इतनी बड़ी मात्रा में नकदी किस काम के लिए लाई गई थी और उसका बंटवारा क्यों किया जा रहा था. विपक्षी दलों ने भी इस मामले को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग पर निशाना साधना शुरू कर दिया है.
डीइओ ने दिए जांच का आदेश
जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं. उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो की जानकारी मिली है. यह वीडियो पुराना भी हो सकता है. वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान कर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी. जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
वही सूत्रों ने बताया कि यदि जांच में वीडियो की सत्यता और संबंधित कर्मियों की पहचान की पुष्टि होती है, तो उन्हें तत्काल निलंबित किया जा सकता है. साथ ही, वीडियो में दिखाई दे रही नकदी के स्रोत की भी विस्तृत जांच की जाएगी. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई के अलावा एफआईआर दर्ज कराने और सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव है. शिक्षा विभाग से जुड़ा यह कथित वीडियो पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है अब लोगों की नजर जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी है.
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