Gopalaganj News:(अजीत) गोपालगंज जिले के पंचदेवरी में शिक्षा का विकास आज सरकार की पहली प्राथमिकता बनी हुई है. इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है. तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं. लेकिन, पंचदेवरी प्रखंड की खालगांव पंचायत का गहनी गांव शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर अकेले ही सवाल खड़ा कर दे रहा है. गांव की स्थिति देख ऐसा लगता है कि सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाएं शायद इस गांव तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं.
78 सालो बाद भी स्कूल नहीं
आजादी के 78 सालों के बाद भी इस गांव में आज तक स्कूल नहीं खोला गया. शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित इस गांव के बच्चे आज भी प्राथमिक शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं. आस-पास के गांवों में स्थित स्कूलों की दूरी अधिक होने के कारण छोटे-छोटे बच्चों को वहां जाने में काफी परेशानी होती है. हालात यह है कि इस विकास के दौर में भी यहां के बच्चों को मानक के अनुरूप प्राथमिक शिक्षा नहीं मिल पा रही है. गांव के कुछ बच्चे तो प्राइवेट स्कूलों या अन्य गांवों में स्थित स्कूलों में जाकर पढ़ाई कर लेते हैं, लेकिन स्कूल के अभाव में अधिकतर बच्चों को पढ़ाई से वंचित रह जाना पड़ता है.
ग्रामीणों ने DM तक पहुंचाया था मामला
गांव में स्कूल नहीं होने का मामला ग्रामीणों ने 2011 में तत्कालीन DM पंकज कुमार पाल तक पहुंचाया था. पहले ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों से गांव में स्कूल खुलवाने की मांग की थी. जब स्थानीय स्तर से कोई सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों द्वारा मामले को डीएम तक पहुंचाया गया था. इसके बाद स्थानीय पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने थोड़ी सक्रियता जरूर दिखायी. पंचायत समिति की बैठक कर गांव में शीघ्र स्कूल खोले जाने का प्रस्ताव रख दिया गया.फिर मामला फाइलों में दफन हो गया.
हर चुनाव में उठाया जाता है यह मुद्दा
जब-जब चुनाव आता है, गांव में स्कूल नहीं होने का मुद्दा ग्रामीणों द्वारा उठाया जाता है. नेताजी लोग वादे भी करते हैं.चुनाव के बाद गांव की यह समस्या सियासत की भेंट चढ़ जाती है. फिर कोई पूछने नहीं आता है कि गांव के बच्चे पढ़ रहे हैं या नहीं. गांव में स्कूल का नहीं होना किसी अभिशाप के कम नहीं है. आज स्थिति यह है कि यह गांव अकेले बुनियादी शिक्षा के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा कर रहा है.
क्या कहते हैं ग्रामीण
इस विकास के दौर में गांव में स्कूल का नहीं होना अभिशाप के समान है. इस समस्या पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों को ध्यान देना चाहिए.
उमेश्वर दुबे, शिक्षाविद कहते है की गांव में स्कूल नहीं होने से बच्चों को प्राथमिक शिक्षा नहीं मिल पा रही है. इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है.
वीरेंद्र दुबे, जनप्रतिनिधि कहते हैं की गांव में स्कूल खुलवाने को लेकर कई बार आवाज उठायी गयी है. लेकिन, आज तक किसी भी स्तर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है. इससे ग्रामीण काफी निराश हैं.
बोले BDO
आयुष राज आलोक BDO गांव की इस समस्या की जानकारी मुझे नहीं थी. विभाग के वरीय पदाधिकारियों को इससे अवगत कराया जायेगा. पंचायत समिति के माध्यम से भी प्रस्ताव भेजा जायेगा. समस्या के समाधान के लिए पूरी कोशिश की जायेगी.
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