Gopalganj News:(प्रशांत पाठक) आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस का दबाव और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच अधिकांश अभिभावकों के पास बच्चों के लिए पर्याप्त समय नहीं होता. ऐसे में बच्चों को व्यस्त रखने या शांत कराने के लिए उनके हाथों में स्मार्टफोन थमा देना आम बात हो गई है.
शुरुआत में यह तरीका आसान और सुरक्षित लगता है, लेकिन साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यही आदत भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है. हाल के दिनों में साइबर ठगी के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें बच्चों की अनजाने में हुई छोटी-सी गलती से अभिभावकों के बैंक खातों से हजारों-लाखों रुपये निकल गए और निजी जानकारी भी साइबर अपराधियों के हाथ लग गई.
ऑनलाइन गेमिंग के जरिए बच्चों को बनाया जा रहा निशाना
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मोबाइल गेम “फ्री-टू-प्ले” मॉडल पर आधारित होते हैं. शुरुआत में गेम मुफ्त दिखाई देते हैं, लेकिन बाद में गेमिंग कॉइन्स, स्किन्स, हथियार और अन्य सुविधाओं के लिए पैसे खर्च करने का दबाव बनाया जाता है.
बच्चे गेम में आगे बढ़ने या दोस्तों से बेहतर प्रदर्शन करने की होड़ में इन सुविधाओं को खरीदने की कोशिश करते हैं. इसी दौरान कई बार वे माता-पिता के मोबाइल में सेव बैंकिंग और यूपीआई सुविधाओं का इस्तेमाल कर लेते हैं.
‘फ्री गिफ्ट’ और ‘रिफंड’ के नाम पर ठगी
साइबर अपराधी बच्चों को निशाना बनाते हुए गेम और विज्ञापनों के माध्यम से मुफ्त गिफ्ट, बोनस कॉइन, रिफंड या दोगुना पैसा मिलने का झांसा देते हैं. बच्चे लालच और उत्सुकता में इन लिंक पर क्लिक कर देते हैं या भुगतान कर देते हैं.
यदि फोन में बैंक कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई की जानकारी पहले से सेव हो, तो ठगों के लिए पैसे निकालना आसान हो जाता है.
सिर्फ पैसा नहीं, निजी डेटा भी हो रहा चोरी
विशेषज्ञ बताते हैं कि कई फर्जी या असुरक्षित गेमिंग ऐप इंस्टॉल करते समय गैलरी, कॉन्टैक्ट्स, लोकेशन और एसएमएस की अनुमति मांगते हैं. बच्चे बिना समझे सभी परमिशन दे देते हैं.
इसके बाद साइबर अपराधी:
- बैंक से आने वाले ओटीपी तक पहुंच बना सकते हैं।
- मोबाइल की तस्वीरें और वीडियो चुरा सकते हैं।
- कॉन्टैक्ट लिस्ट हासिल कर रिश्तेदारों और परिचितों को भी निशाना बना सकते हैं।
- निजी तस्वीरों और डेटा के आधार पर ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं।
बच्चों की मासूमियत बन रही साइबर ठगों का हथियार
साइबर अपराधियों को पता है कि जागरूकता बढ़ने के कारण बड़ों को ठगना पहले की तुलना में कठिन हो गया है. इसलिए अब बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है.
बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं और गेम में जीत-हार को गंभीरता से लेते हैं. गेम कंपनियां और साइबर ठग इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर उन्हें आकर्षक ऑफर और इनाम दिखाते हैं.
अभिभावक इन बातों का रखें विशेष ध्यान
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- बच्चों को मोबाइल का सीमित उपयोग करने दें।
- बैंकिंग ऐप, यूपीआई और कार्ड की जानकारी बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
- मोबाइल में पैरेंटल कंट्रोल फीचर का उपयोग करें।
- किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी जांच करें।
- ओटीपी, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- बच्चों को साइबर सुरक्षा के बारे में नियमित रूप से जागरूक करें।
संवाद और समय ही सबसे बड़ा समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उपायों के साथ-साथ बच्चों के साथ संवाद सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है. अभिभावकों को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, उन्हें खेलकूद, पुस्तक पढ़ने और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना चाहिए.
बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि इंटरनेट की दुनिया जितनी आकर्षक दिखती है, उतनी ही जोखिम भरी भी हो सकती है. यदि किसी प्रकार की गलती हो जाए तो बच्चों को डराने के बजाय उन्हें खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.
साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता, सतर्कता और परिवार के भीतर बेहतर संवाद ही है.
Also Read: गया के 15 केंद्रों पर आज बीसीईसीई-2026 प्रवेश परीक्षा, 7400 से अधिक परीक्षार्थी होंगे शामिल
