गोपालगंज में किसान-मजदूरों का प्रदर्शन, एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत 20 मांगें उठाईं

गोपालगंज में किसान और मजदूर संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में विशाल प्रदर्शन किया. एमएसपी की कानूनी गारंटी, कृषि ऋण माफी, और बिजली निजीकरण रोकने जैसी 20 प्रमुख मांगें उठाई गईं.

गोपालगंज: देशव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत सोमवार को गोपालगंज में किसान और मजदूर संगठनों ने विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. ग्रामीण मजदूर संगठन के बैनर तले पोस्ट ऑफिस चौक से मार्च निकाला गया, जो टाउन थाना होते हुए समाहरणालय पहुंचा. प्रदर्शनकारियों ने जिला पदाधिकारी के समक्ष घेराव किया और समाहरणालय के मुख्य गेट पर नुक्कड़ सभा आयोजित की.

किसान-मजदूर विरोधी नीतियों का लगाया आरोप

सभा को संबोधित करते हुए किसान नेता मुन्ना प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां किसान और मजदूर विरोधी हैं. उन्होंने चारों लेबर कोड वापस लेने और मनरेगा को बहाल करने की मांग की. इसके अलावा कृषि ऋण माफी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रद्द करने और बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई.

एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्ज माफी की मांग

प्रदर्शनकारियों ने सभी कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की मांग की. किसानों और खेत मजदूरों के कर्ज माफ करने, स्मार्ट प्रीपेड मीटर वापस लेने तथा पेट्रोलियम और गैस की कीमत कम करने की मांग भी प्रदर्शन के दौरान उठाई गई.

बाढ़ और जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान की मांग

प्रदर्शनकारियों ने वन अधिकार अधिनियम को सख्ती से लागू करने और महिला, दलित व कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोकने की मांग की. इसके साथ ही बाढ़ से सुरक्षा और जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग भी रखी गई. प्रदर्शनकारियों ने सासामुसा चीनी मिल को दोबारा चालू कराने की मांग भी की.

20 मांगों को लेकर किया प्रदर्शन

प्रदर्शन के दौरान किसान और मजदूर संगठनों की ओर से कुल 20 मांगें रखी गईं. इस दौरान मुन्ना प्रसाद, सच्चिदानंद ठाकुर, विजय कुमार शाही, नागेंद्र प्रसाद, शंकर वर्मा, रामेश्वर सिंह, डेविड मोहन, जितेंद्र मांझी, शिवनाथ बारी, राजेंद्र पाल, मैनेजर माली, चंद्रिका सिंह, ललन राय, रामनाथ महतो, नागेंद्र सिंह, सत्येंद्र प्रसाद, जयराम राम, राजेश कुमार और गौरी शंकर खरवार समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे. प्रदर्शनकारियों ने सभा के दौरान अपनी मांगों के समर्थन में विचार रखे.

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By मनीष राज

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