गोपालगंज से सत्येंद्र पांडेय की रिपोर्ट
Gopalganj Court Murder Case News: गोपालगंज जिला सिविल कोर्ट से न्याय और कड़े कानूनी ऐक्शन की बड़ी खबर सामने आई है. उचकागांव थाना क्षेत्र के श्यामपुर नोनिया टोली गांव में तीन साल पहले हुई एक वृद्ध की जघन्य हत्या के मामले में अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश-14 अमित कुमार पांडेय की माननीय अदालत ने मामले में त्वरित सुनवाई पूरी करते हुए मुख्य आरोपी युवक को हत्या का दोषी पाया है. अदालत ने दोषी को सश्रम आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कड़ी सजा सुनाई है और साथ ही 25 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना (अर्थदंड) भी लगाया है. जुर्माना राशि अदा नहीं करने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा.
लड़की के लापता होने के विवाद में वृद्ध पिता पर किया गया था हमला
कचहरी और अभियोजन पक्ष से प्राप्त आधिकारिक अदालती दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे खूनी खेल की शुरुआत गांव के ही फुलेना साह के परिवार की एक लड़की के लापता होने से हुई थी. लड़की के परिजनों को पूरा शक था कि गांव के ही हरिकिशन साह (भगत) के परिवार के एक युवक ने उसे भगाया है. इसी बात के प्रतिशोध और आक्रोश में आकर 13 जुलाई 2023 की रात फुलेना साह, उनका पुत्र अजय साह, रेखा देवी सहित कुल पांच लोग लाठी-डंडे और हथियारों से लैस होकर हरिकिशन के दरवाजे पर धमक गए. वहां वे लोग गाली-गलौज करते हुए तुरंत लड़की को वापस बुलाने की मांग करने लगे.
विरोध करने पर मौके पर ही कर दी थी बेरहमी से हत्या
जब हरिकिशन भगत और उनकी पत्नी संगीता देवी ने उनके दरवाजे पर आकर गाली-गलौज करने का कड़ा विरोध किया, तो आरोपी अजय साह और उसके सहयोगियों का खून उबल गया. आरोपियों ने जान मारने की नीयत से दोनों बुजुर्गों पर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया. इस बर्बर और जानलेवा हमले में गंभीर चोटें आने के कारण हरिकिशन भगत की मौके पर ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से जख्मी हो गई थीं. घटना के बाद रोते-बिलखते हुए मृतका की पत्नी संगीता देवी ने उचकागांव थाने में नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी.
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दलीलें पूरी होने के बाद दोषी को सीधे भेजा गया मंडल कारा
उचकागांव थाना पुलिस द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान और गवाहों के बयान दर्ज कर कोर्ट में आरोप पत्र (Charge Sheet) समर्पित किए जाने के बाद से ही मामले की स्पीडी ट्रायल के तहत सुनवाई चल रही थी.
कचहरी परिसर में इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला सरकारी वकील (APP) हरेंद्र प्रताप सिंह ने कड़े साक्ष्य और दलीलें प्रस्तुत कीं, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अपनी बातें रखीं. दोनों पक्षों की मैराथन दलीलें और चश्मदीद गवाहों के बयानों को परखने के बाद माननीय न्यायाधीश ने अजय साह को धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद का हुक्म सुना दिया. कोर्ट का फैसला आते ही सासाराम और गोपालगंज कलेक्ट्रेट की तरह सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया और कप्तानों के निर्देश पर दोषी अजय साह को कड़ी सुरक्षा के बीच तत्काल मंडल कारा (Gopalganj Jail) भेज दिया गया है, जिससे पीड़ित परिवार को तीन साल बाद न्याय मिल सका है.
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