Gopalganj POCSO Court: महम्मदपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में छापेमारी के दौरान किशोरियों से छेड़खानी, महिलाओं के साथ मारपीट और ज्यादती के आरोप वाले मामले में जिला जज-6 सह पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश पंकज चंद्र वर्मा ने भोरे के वर्तमान थानाध्यक्ष समेत तीन दारोगा और पुलिसकर्मियों के खिलाफ संज्ञान लिया है. कोर्ट ने आरोपितों के खिलाफ ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है.
कोर्ट के अनुसार, कांड दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक (एसपी) के माध्यम से आरोपित पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को चार बार नोटिस भेजकर कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था. इसके बावजूद कोई भी आरोपित कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ. इसके बाद कोर्ट ने प्रथम दृष्टया आरोपों को संज्ञान योग्य मानते हुए मंगलवार को मामले में संज्ञान लेकर ट्रायल शुरू कर दिया.
इन पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ लिया गया संज्ञान
कोर्ट ने जिन लोगों के खिलाफ संज्ञान लिया है, उनमें भोरे के वर्तमान थानाध्यक्ष रोहिणी उपाध्याय, तत्कालीन थानाध्यक्ष पिंटू कुमार, सब इंस्पेक्टर रामबाबू यादव, सिपाही राजकुमार, जिंदल कुमार, चौकीदार रामजी प्रसाद, ग्रामीण प्रदीप सिंह तथा 15 अज्ञात पुलिस जवान शामिल हैं.
आधी रात में छापेमारी करने का आरोप
पॉक्सो स्पेशल कोर्ट में दायर परिवाद के अनुसार, महम्मदपुर थाना पुलिस दो जून 2025 की आधी रात ट्रायल नंबर-12/2025 में जमानत टूटने का हवाला देकर गांव में छापेमारी करने पहुंची थी. परिवाद में कहा गया है कि मामला जमानती धाराओं का था और परिजनों ने पुलिस को बताया था कि आरोपित जमानत पर हैं तथा रिकॉल आदेश स्थानीय चौकीदार के माध्यम से थाना को दिया जा चुका है. इसके बावजूद पुलिस ने घर में घुसकर कार्रवाई की.
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि छापेमारी के दौरान किशोरियों के साथ छेड़खानी की गई. महिलाओं के कपड़े फाड़कर उन्हें अर्धनग्न अवस्था में सड़क पर खड़ा किया गया और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की गई.
राइफल के कुंदों से मारपीट और सोने की चेन छीनने का आरोप
परिवाद के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने परिवार के पुरुष सदस्यों के साथ राइफल के कुंदों से मारपीट कर उन्हें घायल कर दिया. बीच-बचाव करने पहुंचे अन्य परिजनों के साथ भी मारपीट करने का आरोप है. परिवाद में दावा किया गया है कि एक व्यक्ति के गले से करीब एक लाख रुपये मूल्य की सोने की चेन छीन ली गयी.
वीडियो बना रहे युवक का मोबाइल छीनने का भी दावा
परिवाद में कहा गया है कि घटना का वीडियो बना रहे एक युवक का मोबाइल पुलिसकर्मियों ने छीन लिया. मोबाइल के कवर में रखे दो हजार रुपये निकाल लिए गए और मोबाइल वापस नहीं किया गया. आरोप है कि परिवार के तीन सदस्यों को जबरन थाना ले जाकर झूठे मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गयी.
ग्रामीणों को भी मुकदमे में फंसाने की धमकी का आरोप
परिवाद के अनुसार, घटना के दौरान जब ग्रामीण बीच-बचाव के लिए पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने वर्दी का भय दिखाते हुए उन्हें भी झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी. इसके कारण कोई भी ग्रामीण हस्तक्षेप नहीं कर सका.
इलाज के बाद जेल भेजने का परिवाद में दावा
परिवाद के अनुसार, घायल महिलाओं और युवकों का इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सिधवलिया में कराया गया. परिवादी पक्ष का दावा है कि अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड में इलाज का समय दर्ज है. इसके बावजूद परिवार के सदस्यों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया.
