Gopalganj News : शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठकों में अब केवल आंकड़े पेश करना पर्याप्त नहीं होगा. जिले से भेजी गयी रिपोर्ट में जो तस्वीर दिखाई जा रही है, उसकी हकीकत अधिकारी मौके पर जाकर जांचेंगे. विभाग ने जिलों से भेजे जाने वाले आंकड़ों और प्रतिवेदनों की जमीनी पड़ताल के लिए संयुक्त सचिव श्रीप्रकाश को गोपालगंज का निरीक्षी पदाधिकारी नामित किया है.
हर सप्ताह समीक्षा बैठक के बाद निरीक्षी पदाधिकारी शनिवार तक जिले का दौरा करेंगे. इस दौरान जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से भेजे गये आंकड़ों का मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान किया जायेगा. पिछली समीक्षा बैठक में दिये गये निर्देशों पर जिले में कितना काम हुआ, इसकी भी जांच की जायेगी.
साप्ताहिक समीक्षा के बाद होगी जमीनी पड़ताल
शिक्षा विभाग के विशेष सचिव धर्मेंद्र कुमार ने निरीक्षी पदाधिकारी को इस संबंध में निर्देश जारी किया है. विभाग की साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से विभागीय कार्यों की समीक्षा होती है.
इसी दौरान अधिकारियों की ओर से भेजी गयी रिपोर्ट और जमीनी स्थिति के सत्यापन की जरूरत को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गयी है. अब बैठक में बतायी गयी प्रगति का मौके पर सत्यापन किया जायेगा.
14 बिंदुओं पर होगी विभागीय योजनाओं की जांच
निरीक्षण के दौरान शिक्षकों के वेतन भुगतान के साथ लिपिक और परिचारी के वेतन की स्थिति भी देखी जायेगी. लंबित शिकायतों के निष्पादन, एसी-डीसी, यूसी और बीसी-ईबीसी व एससी-एसटी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की स्थिति की भी जांच होगी.
इसके अलावा लंबित कोर्ट केस और प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की कॉज लिस्ट में शामिल एलपीए मामलों की पड़ताल की जायेगी. प्राथमिक शिक्षा की ई-संबंधन रिपोर्ट, जन शिक्षा की केआरपी रिपोर्ट और सरस्वती विद्या निकेतन से जुड़ी रिपोर्ट भी जांच के दायरे में रहेगी.
एमडीएम, बीएसईआईडीसी, निगरानी, एससीईआरटी और बिहार शिक्षा परियोजना के कार्यों की स्थिति भी मौके पर देखी जायेगी. इस तरह कुल 14 बिंदुओं पर विभागीय कार्यों और रिपोर्ट की जमीनी स्थिति का सत्यापन किया जायेगा.
फाइल में काम पूरा तो जमीन पर भी दिखना चाहिए
निरीक्षण का सबसे अहम पहलू पिछली समीक्षा बैठक की रिपोर्ट होगी. बैठक में जिले की ओर से बतायी गयी प्रगति और मौके पर वास्तविक स्थिति का मिलान किया जायेगा. यानी यदि फाइल में किसी काम को पूरा बताया गया है, तो निरीक्षण के दौरान उसकी वास्तविक स्थिति भी सामने आनी चाहिए.
जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि विभाग को भेजे जाने वाले सभी आंकड़े और प्रतिवेदन पूर्ण, सत्यापित और अद्यतन हों. इससे रिपोर्ट तैयार करने में लापरवाही पर भी रोक लगने की उम्मीद है.
शनिवार तक निरीक्षण, सोमवार को भेजनी होगी रिपोर्ट
निरीक्षी पदाधिकारी को निर्धारित समय-सीमा में निरीक्षण पूरा कर सोमवार को अनुपालन प्रतिवेदन शिक्षा विभाग के आईटी मैनेजर को देना होगा. जिन निरीक्षी पदाधिकारियों को विभाग की ओर से वाहन उपलब्ध नहीं है, वे जिला शिक्षा पदाधिकारी, पटना से वाहन की मांग कर सकेंगे.
हर सप्ताह फाइल में दर्ज दावों की जमीनी हकीकत की जांच होने से स्कूलों और शिक्षा कार्यालय से जुड़े कार्यों में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है.
