Bihar Police: बिहार एसटीएफ ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए गोपालगंज और सीवान जिले के कुख्यात इनामी अपराधी अनिल कुमार उर्फ अनिल कुमार प्रसाद उर्फ पंकज को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के अनुसार, अनिल वर्ष 2024 में मीरगंज थाना की पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था और करीब दो वर्षों से पुलिस को चकमा दे रहा था.
उस पर राज्य स्तर से 50 हजार रुपये और सीवान पुलिस की ओर से 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था. गुजरात में उसकी गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ और स्थानीय पुलिस उससे पूछताछ कर रही है.
एक सप्ताह से गुजरात में डेरा डाले थी STF
मीरगंज थाना से फरार होने के बाद अनिल ने अपनी पहचान छिपाकर गुजरात में ठिकाना बना लिया था. पुलिस को उसकी मौजूदगी की तकनीकी जानकारी मिलने के बाद बिहार एसटीएफ की टीम करीब एक सप्ताह से गुजरात में कैंप कर रही थी.
मंगलवार को सटीक लोकेशन मिलने के बाद टीम ने घेराबंदी की और अनिल को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपी सीवान जिले के लकड़ी नबीगंज थाना क्षेत्र के किशुनपुरा निवासी मिथिलेश प्रसाद का पुत्र बताया गया है.
सीमावर्ती इलाकों में लूट-डकैती के गिरोह से जुड़ा था
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अनिल सीवान और गोपालगंज के सीमावर्ती इलाकों में राहगीरों को हथियार दिखाकर लूट और डकैती करने वाले गिरोह का सदस्य रहा है.
उसके खिलाफ लूट, डकैती, आर्म्स एक्ट, मादक पदार्थों से जुड़े मामले और पुलिस अभिरक्षा से फरार होने समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं.
इन मामलों में दर्ज है केस
मीरगंज थाना, गोपालगंज: कांड संख्या 31/24, दिनांक 1 फरवरी 2024. यह मामला पुलिस अभिरक्षा से फरार होने से संबंधित है.
सिधवलिया थाना, गोपालगंज: कांड संख्या 159/19 में डकैती, 146/19 में लूट, 190/19 में आर्म्स एक्ट व एनडीपीएस, 192/19 में लूट तथा 81/20 में जानलेवा हमला, आर्म्स एक्ट व एनडीपीएस से जुड़े मामले दर्ज हैं.
बसंतपुर/लकड़ी नबीगंज ओपी, सीवान: कांड संख्या 298/19 में लूट तथा 489/22 में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज है.
फरारी के दौरान किसने दी थी पनाह?
गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की पूछताछ में फरारी के दौरान उसके संपर्क में रहे लोगों और संभावित शरणदाताओं की जानकारी जुटायी जा रही है. एसटीएफ और स्थानीय पुलिस उसके आपराधिक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी हासिल करने में लगी है.
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गुजरात में अनिल ने किन लोगों की मदद से अपना ठिकाना बनाया था और फरारी के दौरान वह किन गतिविधियों में शामिल रहा.
इनामी अपराधी की गिरफ्तारी को बिहार एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है. अब पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई के साथ उसके पुराने आपराधिक नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है.
इसे भी पढ़ें: बिहार पुलिस को मिलेगा नया मुखिया, जानिए कौन-कौन से आईपीएस अधिकारी हैं मुख्य दावेदार
