गोपालगंज के भोरे में 30 की जगह 10 छात्रों पर एक शिक्षक, कई स्कूलों में छात्र कम फिर भी शिक्षक ज्यादा

गोपालगंज के भोरे प्रखंड के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या छात्रों से कहीं ज़्यादा है. सरकारी मानक के अनुसार 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए, लेकिन यहां तस्वीर बिल्कुल उलट है. कुछ स्कूलों में तो शून्य छात्र होने पर भी शिक्षक तैनात हैं.

Gopalganj News: गोपालगंज के भोरे प्रखंड के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात सरकारी मानक से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहा है. सरकारी मानक के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक 30 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था होनी चाहिए. वहीं, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भोरे प्रखंड के 80 प्राथमिक एवं नवसृजित प्राथमिक विद्यालयों में कुल 3979 छात्र और 392 शिक्षक कार्यरत हैं. इस हिसाब से औसतन करीब 10 छात्रों पर एक शिक्षक हैं.

कई स्कूलों में छात्रों से ज्यादा शिक्षक

आंकड़ों के अनुसार प्रखंड के कुछ विद्यालयों में छात्रों की संख्या बेहद कम है, लेकिन वहां कई शिक्षक पदस्थापित हैं. सबसे चौंकाने वाली स्थिति पीएस बंधवा बनटरिया की है, जहां छात्रों की संख्या शून्य बतायी गयी है, जबकि तीन शिक्षक पदस्थापित हैं.

वहीं पीएस अमही मिश्र में 30 छात्र और आठ शिक्षक, पीएस नोनियाछापर में 70 छात्र और आठ शिक्षक, पीएस बगहवां मिश्र में 102 छात्र और नौ शिक्षक तथा पीएस मोतीपुर एराजी में 71 छात्र और नौ शिक्षक कार्यरत हैं.

80 स्कूलों में 3979 छात्र, 392 शिक्षक

भोरे प्रखंड के 80 प्राथमिक एवं नवसृजित प्राथमिक विद्यालयों में कुल 3979 छात्र और 392 शिक्षक कार्यरत हैं. इस तरह औसतन एक शिक्षक पर करीब 10 छात्र हैं, जबकि निर्धारित मानक 30 छात्रों पर एक शिक्षक का है.

उपलब्ध आंकड़ों में एनपीएस तिवारी बगहवा में 10, एनपीएस पाखोपाली में 11, पीएस कोरेया दीक्षित में 14, पीएस बेलवा मिश्र में 17, एनपीएस करमासी में 18, पीएस पांडेय चकिया में 21, एनपीएस रघुनाथपुर टोला बिलरूवा में 21, एनपीएस करमासी भगत टोला में 24 और एनपीएस चौमुखा पोखर भिंडा में 24 छात्रों का उल्लेख है.

स्थानांतरण प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि बीपीएससी से नियुक्त कई शिक्षकों की मूल पदस्थापना दूसरे जिलों में थी, लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा से निकटता के कारण उन्होंने भोरे के विद्यालयों में स्थानांतरण करा लिया. यह भी आरोप है कि कई विद्यालयों में रिक्ति नहीं होने के बावजूद शिक्षकों की पोस्टिंग की गयी.

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि होना बाकी है.

संसाधनों के संतुलित उपयोग पर सवाल

आंकड़े बताते हैं कि भोरे प्रखंड के कई विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात सरकारी मानक से काफी अलग है. कुछ विद्यालयों में छात्रों की संख्या अत्यंत कम होने के बावजूद कई शिक्षक तैनात हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में शिक्षकों की आवश्यकता हो सकती है.

यदि इन आंकड़ों और स्थानांतरण प्रक्रिया की प्रशासनिक जांच करायी जाए, तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है. यह मामला शिक्षा विभाग में पदस्थापना और संसाधनों के संतुलित उपयोग पर सवाल खड़ा करता है.

इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि पूरे मामले की रिपोर्ट विभाग को भेज दी गयी है.


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By सुरेश राय

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