बचपन से ही संघर्ष कर रही सुनीता कुंवररसोइया प्रकरण : बचपन में उठा मां-बाप का साया, तो शादी के बाद पति का छूटा साथबच्चों की परवरिश के लिए समाज में कर रही संघर्षफोटो- 7संवाददाता, कल्याणपुर (गोपालगंंज)बरौली प्रखंड के कल्याणपुर मिडिल स्कूल की विधवा रसोइया सुनीता कुंवर का जीवन बचपन से ही संघर्ष के बीच गुजर रहा है. बचपन में उसके सिर से मां-बाप का साया उठा, तो शादी के बाद पति का साथ छूट गया. असम के धोबड़ी जिले के गौरी बाजार के रहनेवाले हरिशचंद्र सिंह की बेटी सुनीता कुंवर के सिर से बचपन में ही मां-बाप का साया छिन गया. चाचा सुरेश सिंह ने उसका पालन-पोषण किया. जब उसने होश संभाला, तो कल्याणपुर के रहनेवाले दारोगा सिंह से उसके चाचा ने 1998 में उसकी शादी कर दी. शादी के बाद वह कल्याणपुर पहुंची. इस बीच वह दो बच्चों की मां बन गयी. पहला बेटा सूरज कुमार तथा दो साल के अंतराल पर दूसरा बेटा दीपक का जन्म हुआ. 2002 में पति दारोगा सिंह दुनिया से चल बसा. बच्चों के लिए समाज से किया संघर्षपति के निधन के बाद उसने दो बच्चों की परवरिश को लेकर जीवन से संघर्ष की शुरुआत की. सास-ससुर का भी प्यार उसे नहीं मिला. उसने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संघर्ष को स्वीकार किया. मेहनत-मजदूरी कर बच्चों की रोटी की व्यवस्था बड़ी मुश्किल से कर रही थी. इस बीच वर्ष 2007 में कल्याणपुर मिडिल स्कूल में रसोइया का काम मिल गया. सात वर्ष तक काम करने के बाद उसे वर्ष 2014 में रसोइये के पद से हटा दिया गया. उसने डीएम के जनता दरबार में फरियाद की. इस बीच जब रोटी के लाले पड़ने लगे, तो बड़ा बेटे सूरज को गुजरात मजदूरी करने के लिए भेजना पड़ा. 10 माह के संघर्ष के बाद डीएम के आदेश पर पुन: उसे रसोइये के पद पर काम करने का निर्देश नौ दिसंबर, 2015 को जिला एमडीएम प्रभारी ने दिया. उसने 14 दिसंबर को योगदान किया. 16 दिसंबर को ग्रामीणों ने खाना बनाने पर बैन लगा दिया. बच्चों को स्कूल भेजने की अपीलकल्याणपुर मिडिल स्कूल में सीआरसीसी की बैठक अाफताब आलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें गुणवत्तापूर्वक शिक्षा पर जोर दिया गया. वहीं, प्रधानाध्यापक निखिलेश्वर कुमार सिंह ने बताया कि गांव में एक-एक घर में जाकर बच्चों को भेजने के लिए अपील की गयी है. विद्यालय में अपेक्षित बच्चे आ रहे हैं. शांतिपूर्ण माहौल में पढ़ाई हो रही है. इस मौके पर शिक्षक सतानंद पाठक, पप्पू प्रसाद, विजय सिंह, जातीय शितारा, अब्दूल रफीक आदी मौजूद थे.
बचपन से ही संघर्ष कर रही सुनीता कुंवर
बचपन से ही संघर्ष कर रही सुनीता कुंवररसोइया प्रकरण : बचपन में उठा मां-बाप का साया, तो शादी के बाद पति का छूटा साथबच्चों की परवरिश के लिए समाज में कर रही संघर्षफोटो- 7संवाददाता, कल्याणपुर (गोपालगंंज)बरौली प्रखंड के कल्याणपुर मिडिल स्कूल की विधवा रसोइया सुनीता कुंवर का जीवन बचपन से ही संघर्ष के बीच गुजर […]
